अभिव्यक्ति की आजादी अभिव्यक्ति की बात Hindi Article

                                                          अभिव्यक्ति की आजादी

           अभिव्यक्ति की आजादी इन शब्दों में ही सब कुछ निहित है आज के दौर में किसी ने कुछ भी कहा उसे वह साबित करने में लग जाता है कि उसने जो कुछ कहा सत्य कहा और उसे इस बात की उसे स्वतंत्रता है कि वह जो चाहे कहे अब तो बात यहां तक पहुंच गई है कोई भी कुछ भी बोल देता है वह यह नहीं सोचता कि उसे कुछ भी बोल देने की आजादी किसी ने नहीं दी है वह अपने अधिकार की बात करता है अधिकार के साथ तो कहता है मुझे इस देश में मुझे इस देश में कुछ भी बोलने की आजादी मिली है।उसे बोलने की स्वतंत्रता देश के कानून ने दिया है व्यक्ति विशेष अपने को महिमामंडित करने में कहीं भी कुछ भी बोल जाता है वह अपने को बताने में लगा है कि उसने जो कुछ कहा वह सत्य है और इसके लिए वह कोई भी उदाहरण देने को तैयार हो जाता है,तब जाकर  बहस हो जाती है और उस की हठधर्मिता को देखते हुए सामने वाला चुप हो जाता है उस समय वह व्यक्ति सोचता है सामने वाला उसकी बात मान लिया वह अपने को विजेता घोषित कर देता है,जब कि सामने वाला उससे उस विषय पर कोई वार्ता नहीं करना चाहता वह व्यक्ति जय और पराजय से काफी दूर होता है क्योंकि उसके स्वभाव में जीत हार की धारणा नहीं होती वह जो कुछ कह रहा होता है प्रमाणिकता के साथ कहता है । क्या होता है अब सामने वाला उसे नहीं मानता है उसके ऊपर छोड़ देता है वह जो निर्णय लेता है ,वह उसके अधिकार क्षेत्र में होता है यह वह मानता है बहुत सारे बहुत सारे कवि कलमकार अपनी रचना में अपने मन की भड़ास निकालते हैं और इसे साहित्य का  दर्जा तक दे डालते हैं इस तरह अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर कोई भी जो कुछ भी साबित करना चाहता है वह साबित भी नहीं पाता ।
            साहित्यिक कार्यक्रमों में मंच संचालक पहले ही घोषित कर चुके होते हैं बोलने के लिए समय दिया जा रहा है उसके बावजूद अभिव्यक्ति की आजादी को मानते हुए मंच के माननीय /माननीया समय का अतिक्रमण करते हैं और अपने को सब कुछ साबित करने के प्रयास में लग जाते हैं ।उस समय अपने मन से वे वो  कुछ कर जाते हैं जिसके लिए उन्हें शर्मिंदा भी होना पड़ता है पर क्योंकि वह आत्ममुग्धता की स्थिति में होते हैं इसलिए वह खुद को जांच परख नहीं पाते हैं 
         यह होना यह चाहिए कि हम खुद को समझें समय की मांग को देखते हुए अपनी अभिव्यक्ति जरूर करें लेकिन अभियक्ति की आजादी का नाजायज फायदा ना उठाएं जहां भी मौका मिलता है अब कुछ शब्दों में कुछ वाक्यों में अपनी बात रख सकते हैं इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप लंबा-चौड़ा अपना अभिभाषण दें या लंबी-चौड़ी कोई कविता पढ़ें या लंबा चौड़ा कोई आलेख  पढ़ें क्योंकि सुनने वाला  सब कुछ समझ रहा है वह वह सब कुछ समझता है , लेकिन वह कुछ बोलता नहीं है क्योंकि वह जानता है कि उसके बोलने से कुछ भी नहीं होने वाला है। अभिव्यक्ति की आजादी क्षेत्र में आपको दिख जाएगी अभिव्यक्ति की आजादी का सबसे ज्यादा अवहेलना देश के नेताओं में दिख जाएगा चाहे छुटभैया नेता या कोई बड़ा नेता अपने को दिखाने बताने में यह भूल जाते हैं अभिव्यक्ति की आजादी नाजायज फायदा नहीं उठा सकते फिर भी वह हमेशा यही प्रयास करते रहते हैं कुछ जुमलों से वह ऐसी हरकतें करते हैं आमजन सारी बातें भूल उसके द्वारा किए गए मनोरंजन में आनंद उठाने लगता है लेखन में अभिव्यक्ति की आजादी का बहुतायत दुरुपयोग हो रहा है समाज में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो अपने कलम से  नाम पर जाति के नाम पर सत्ता के नाम पर वह बातें कह जाते हैं  जो आमजन सुनना भी नहीं पसंद करता।      
                 अभिव्यक्ति की आजादी का प्रदर्शन पूरे देश में हो रहा है जिसका प्रभाव नेट और इंटरनेट पर हो गया क्या बोलना है क्या नहीं बोलना है क्या   नहीं करेंगे सब कुछ वह भूल जाते हैं। तब तक हम खुद को अपने विचारों में एक नहीं दिखा पाएंगे हम नहीं समझ पाएंगे।

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