आधुनिक युग में उपेक्षित  हिन्दी|Hindi Litrature artcle

आधुनिक युग में उपेक्षित  हिन्दी

आधुनिक युग में उपेक्षित  हिन्दी|

हिन्दी|

राज भाषा  और अनौपचारिक  रूप  से राष्ट्र  भाषा  भी है ।

     संविधान  की आठवीं  सूची में  मान्यता  प्राप्त  भाषाओं  में  हिन्दी  को राज भाषा के रूप में मान्यता  प्राप्त  है ।किन्तु  कहीं  भी राष्ट्र  भाषा  के रूप  में  हिन्दी  का उल्लेख  नहीं  है ।यहीं  से हिन्दी  की उपेक्षा का समय प्रारंभ  हो जाता है ।हिन्दी ने परतंत्र भारत को स्वतंत्रता  दिलाने में  महत्वपूर्ण भूमिका  का निर्वहन किया है ।उस समय के अनेक  अहिन्दी भाषी नेताओं  ने इसे राष्ट्र  भाषा  बनाने  की पुरजोर  वकालत की थी ।किन्तु  हिन्दी  का दुर्भाग्य  कि आज भी वह राष्ट्र  भाषा  के रूप  में  प्रतिष्ठित  नहीं  हो पाई है ।

   हिन्दी  को संविधान  द्वारा  14सितम्बर  1949को राज भाषा  का दर्जा  प्रदान  किया  गया और समय समय पर उसके प्रचार प्रसार हेतु अनेक   कदम भी उठाये जाते रहें  हैं  ।आज भी हिन्दी  को बढ़ावा देने  के लिए  सरकार  द्वारा  अनेक कार्य क्रम चलाये जा रहें  हैं  ।

प्रचार  प्रसार  हेतु अनेक  योजनाएँ  ,प्रतियोगिताएँ  सम्मान, पुरस्कार  की व्यवस्था  की जाती है ।

सर्वप्रथम  विवेकानंद  जी ने विश्व  क्षितिज  पर हिन्दी  को और फिर माननीय अटलबिहारी  बाजपेई जी प्रतिष्ठित  करने का प्रयास  किया  ।इन्होंने  विदेश  में  हिन्दी  में  ही अपना भाषण देकर अपनी हिन्दी  भाषा  को सम्मानित  करने का कार्य  भी किया।आज विश्व की भाषाओं  में  तीसरे स्थान  पर हिन्दी  है ।पहले पर चाइनीज दूसरे  पर अंग्रेजी  और तीसरे पर हिन्दी  है ।हिन्दी  सर्वाधिक  वैज्ञानिक  भाषा  है यह जैसी  बोली जाती है वैसी ही लिखी भी जातीहै ।

   आधुनिक  युग में  तो कम्प्यूटर  में  ऐसा साफ्टवेयर डवलप कर लिया गया है कि किसी भी भाषा  की सामग्री  को हिन्दी  में  रूपान्तरित किया जा सकता है ।यह हमारीसंचार भाषा  ,विज्ञापन  की भाषा  ,बाजार की भाषा   बनाने चुकी है लेकिन  समस्या  कार्यालयी प्रयोग  की है जो अंग्रेजी  मानसिकता  के अधिकारी ,क्लर्क  ,और राजनेताओं  की बजह से प्रयोग  में  नहीं  आरही है ।इनके द्वारा  वोट बैंक  और स्टेट सिंबल मानकर अंग्रेजी  में  ही कार्य  किया  जा रहा है ।कुछ  राजनेताओं  की क्षेत्रीय  राजनीति  के कारण भी सरकारी कामकाज  की भाषा और राष्ट्र भाषा नहीं  बन पाईं है ।लेकिन  वह दिन दूर नही जब यह राष्ट्र  भाषा  के पद पर सुशोभित  होगी इसने अपनी विश्व  में  पहचान बनाईहै ।हम सभी साहित्यकारों  ,शिक्षकों  राजनेताओं  द्वारा  हिन्दी  का अधिकाधिक  प्रयोग  किया  जाए और सरकार  द्वारा  प्रचार  प्रसार  हेतु  प्रोत्साहन  हेतु सम्मान  पुरस्कार  की व्यवस्था  की जाए तभी यह उपेक्षित  कहीं जाने वाली भाषा  हिन्दी  विश्व  पटल पर सम्मानित  हो सकेगी 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *