खुश रहने से बेहतर होती है शारीरिक और मानसिक सेहत।सोशल मीडिया

 सोशल मीडिया से थोडे दिन दूर रहेंगे तो खुश रहेंगे

खुश रहने से बेहतर होती है शारीरिक और मानसिक सेहत।

 
प्रसन्नता सेहत को बेहतर कर सकती है नई शोधो के अनुसार इंसान सकारात्मक रहे तो उसका शरीर मन दोनों स्वस्थ होंगें।और उसे  सन्तुष्टि का अहसास मिलता है।
 
 
तनाव कम होगा यदि फेसबुक और ट्वीटर का उपयोग कम करेंगे।रिसर्च के अनुसार लगातार सोशल मीडिया के सम्पर्क में बने रहने से हमारी सोच प्रभावित होती है।फेस बुक के ज्यादा उपयोग  शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होता है।सोशल मीडिया पर रोज जितना ज्यादा समय बिताएंगे।तनाव होने की उतनी ही ज्यादा आशंका होती है।इसका जरण यह है कि इंस्ट्राग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी तुलना दुसरो से करने लगते है।कुछ दिन अगर सोशल मीडिया से दूर रखेंगे तो यह आपको खुशी देगा।
 
सोशल मीडिया से थोडे दिन दूर रहेंगे तो खुश रहेंगे
रोज ऐसे काम कीजिये जिससे  आप सकारात्मकता महसूस करे।
 
 
केवल खुश रहकर ही स्वस्थ नही ररह सकते।रोमांच आश्चर्य गर्व ताकतवर महसूस करने जैसी भावनाओ की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है।नए अध्ययन में पाया गया कि लोग जितनी ज्यादा तरह की पोजेटिव भावनाओ को महसूस करते हेउनके खून में सूजन के संकेतक उतने कम होते है।: माफ करने मि आदत डालें।पुरानी गलतियों को भूल जाये।
 
अध्ययन के अनुसार खुद को और दुसरो को माफ करने से तनाव और उससे पैदा होने वाली  समस्याओं से बचा जा सकता हर। शोध के अनुसार जिनके जीवन मे तनाव ज्यादा होता है उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दुसरो के मुकाबले बदतर होता है। अगर हम लोगो को।माफ करना सीख ले तो हमारे जीवन के तनाव भी Kam  होगा हम।खुश और सकारात्मक रह पायेंगे। 
 
काम से ब्रेक ले छुटटी की योजना बनाये।
 
थोड़े समय काम से दूर रह कर 
तनाव मुक्त रह सकते है।छुट्टिया अच्छी बीतती है तो लौटने के बाद परफ़ॉर्मेंस अच्ची होती है काम को ओर बेहतर कर पाते है।
पैसा खर्च कर समय बचाइये।
 

पैसे से खुशी नही खरीदी जा सकती लेकुन इससे समय की बचत की जा सकती है।हाल ही में कनाडा और अमेरिका में 6000 लोगो पर किये गए शोध के अनुसार जो लोग पैसे खर्च कर समय की बचत करते है वो जीवन मे ज्यादा सन्तुष्ट महसूस करते है।

 

: दोस्तो से परिवार की तरह नजदीकी बनाये।

 

करीब 109 देशो में हुए सर्वे के अनुसार उम्र बढ़ने के समय दोस्त स्वास्थ्य ऒर  प्रसन्नता के लिए अधिक महत्वपूण हो जाते है।इसमें यह भी बताया गया है कि बुढ़ापे में मदद करने वाले दोस्त खुशी के लिए परिवारसे भी ज़्यादा सूचक है। प्रोफेसर विलियम  चापिक के अनुसार खुशी के लिए परिवार और दोस्ती कि भूमिका एक समान महत्वपूर्ण होती है।लेकिन उम्र बढ़ने के साथ नजदीकी दोस्त ही संपर्क में बने रहते है।

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