चाहत – Hindi Poetry

चाहत - Hindi Poetry

                                                                                                          चाहत – Hindi Poetry

संगिनी हु  मै तुम्हारी 

साथ चलूंगी साया बनकर 

हम संग हैं तो सारा जहाँ 

लगे प्यारा,न्यारा सा 

हम मौन है मगर खामोशिया 

कर रही हैं प्रेम निवेदन 

प्रकति भी दे रही इशारा 

ये प्रीत सदा यु ही निखरती रहे.

हर जगह तुम ही नजर आते हो। 

बनकर नीर तुम नयनो से,

छलक जाते हो। 

यही सच्चा प्यार 

तुम जीवन का आधार 

तुम जीने की उम्मीद हो 

तुम  विश्वास हो। 

मेरी हर स्वांस मे हो। 

हर पल मन मे उत्साह भरते हो। 

अब तो समझो मेरे मन की बात 

जताओ अपनी चाहत। 

न रहो मुझसे दूर 

करो कोई यतन अब मिलन का 

समझो मेरी बात 

अब थाम लो मेरा हाथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *