तुम्ही कहो – Hindi Poem

 
तुम्ही कहो   
तुम किसी को कुछ भी कहो
किसी को डाँटो
प्यार करो पर मैं कुछ न बोलू
फिर कैसे जियु तुम्हीं  कहो।
समाज की विसंगतिया
कब होगी समाप्त
कब मिलेगी नारी को सुरक्षा
सामान रूप से जीने का अधिकार
तुम्ही कहो
रेत  होता अस्तित्व
कब लेगा सुन्दर आकार
तुम्ही कहो .
एक उम्मीद में जी रही हैं
आज की नारी
बुन रही हैं सुनहरे ख्वाब कि
कल तो कोई आएगा
जो देगा ठंडक मन को
काँटों में फूल खिलायेगा
देगा सम्बल मन को
खुशियों से महकायेगा जीवन को
तुम्ही कहो।
पूरा हैं भरोसा नारी को
एक दिनअवश्य आएगा

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