नई ख्वाइशें| रचने लगी हूँ कुछ नया Hindi Kavita Poem motivational

नई ख्वाइशें

 
रचने लगी हूँ कुछ नया
एक उजास मन
के भीतर।
फूलों सी महकने लगी हूँ मैं
चांदनी बन बिखर
रही हूँ।
हाँ खुद पर यकीं कर 
रही हूं मैं
सच मानो तो खुद से मिल 
रही अब।
अपने अस्तित्व के लिये 
लड़ रही मैं।
जीना सीख रही हूँ
नदी सी बहने लगी हूँ
आगे बढ़ रही हूँ
नव ख्वाईशें कर रही 
चने लगी हूँ कुछ नया

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