नव सृजन करती नारी |Women Empowerment Hindi Article

 

नव सृजन करती नारी। 
 
समाज मे आज भी महिलाओ की भूमिका को नज़र अंदाज़ किया जाता है।इसके कारण महिलाओ को असमानता सामाजिक  उत्पीड़न.आदि बुरा बर्ताव सहन करना पड़ता हैं।ये बर्ताव महिलाओ को व्यक्तिगत उंच इयो को प्राप्त करने में अवरुद्ध कर रहे हैं।पहले की अपेक्षा महिलाओं की दशा पर सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी देश की आधी आबादी अपने अनेक अधिकारों से वंचित है।

नारी गहरी हैं सागर सी 

आज भी हमारे सामने पीड़ित महिलाओं के उदाहरणों में कमी नही है। समाचार पत्र, समाचार चैनल, वेब चैनल, रेप, दहेज़ के लिए हत्या, भ्रूण हत्या की घटनाओं से भरे पड़े मिलते हैं, इन आंकड़ों में दिन व दिन बढ़ोतरी हो रही है। महिलाओं से होने वाली हिंसा और शोषण की घटनाएं खत्म होने का नाम नही ले रही। आज हर क्षेत्र में पुरुष के साथ ही महिलाएं भी तमाम चुनौतियों से लड़ रही हैं, सामना कर रही हैं, कई क्षेत्रों में तो महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि समाज के कुछ पुरुष प्रधान मानसिकता वाले तत्व यह मानने के लिए तैयार नही हैं कि महिलाएं भी उनकी बराबरी करें, ऐसे लोग महिलाओं की खुले विचार वाली कार्य शैली को बर्दाशत नही कर  पाते हैं। शायद इसलिए कभी तस्लीमा नसरीन जी चर्चित हुई तो कभी दीपा मेहता। आज भी हमारे समाज में महिला केंद्रित आलेख और सिनेमा आसानी से स्वीकार नही किए जाते हैं, कहीं न कहीं उनका विरोध शुरू हो जाता है। क्या महिलाओं को अधिकार नही है कि वे खुलकर अपने विचारों को समाज के सामने रखें।हर स्त्री आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हो किसी दवाब में ना रहे।समाज मे उसके साथ कैसा व्यवहार होता हैं उसका सामना करे । मन की दृढता भी जरूरी हैं।हर  हाल में अपने मनोबल को बनाये रखे ।स्त्री को स्वतंत्रता । मिले और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर स्वतंत्र रूप से शांतिपूर्वके अपना जीवन व्यतीत कर सके ।
 
प्रेम गंगा सी अनवरत बहती 
 
 । जब तक देश की आधी आबादी सशक्त नही होगी हम विकास की कल्पना भी नही कर सकते। समय की मांग है और समाज की जरूरत भी कि महिलाओं को भी पुरुषों के सामान अधिकार मिले, उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलें।
 
क्या है यह महिला सशक्तिकरण ? सशक्तिकरण के साथ यह भी जानकारी होना चाहिए कि हम कहीं सशक्तिकरण के नाम पर अराजकता तो नही फैला रहे हैं। कहीं हम समाज में प्रचलित रीति-रिवाज और प्रथाओं का उलंघन तो नही कर रहे। हम नारी  स्वतंत्रता का गलत फायदा तो नही उठा रहे। कहीं हमे गलती फहमी तो नही हैं कि सशक्त होने का मतलब ही मन-मर्जी से जीना और सामाजिक रीतियों को तोड़कर अपनी अच्छी-बुरी हर ख्वाहिशों । सरल शब्दों में परिभाषित करें तो हम यह कह सकते हैं कि महिलाओं को अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े हर काम का खुद निर्णय लेने की क्षमता होना ही सशक्तिकरण है।
 
अपनी निजी स्वतंत्रता और खुद फैसले लेने के लिए महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। अब सवाल यह उठता है कि क्या महिला सशक्तिकरण सम्भव है, तो इसके लिए यही जबाव है कि जब तक महिलाएं खुद अपने-आप के दैहिक, मानसिक और  शारीरिक हर तरह से खुद को पुरुषों से ऊपर समझे और उनकी निर्भरता की सोच से बाहर आए। खासकर हमारे पारंपरिक ग्रामीण समाज की महिलाएं जो अपनी इच्छा शक्ति, स्वतंत्रता और स्वाभिमान को दबाकर जीने के लिए मजबूर हैं। प कहने को तो बेटी घर की लक्ष्मी होती है लेकिन घर के बाहर हर जगह वह तर्क-कुतर्क और विकृत मानसिक लोगो की शिकार होती है, हिंसा की शिकार होती है, लांछित होती है। 
 
 शिक्षित होने लगीं हैं, हर क्षेत्र में आगे बढऩे लगी हैं, लेकिन फिर भी सवाल वहीं की वही है कि क्या महिलाओं का शोषण बन्द हो गया है? क्या महिलाओं पर होने वाली हिंसा रुक गई है?  लेकिन सुधार नही होता। आखिर क्यों? ऐसा क्यों?  जन्म से पहले कन्या भ्रूण हत्या किया जा रहा है, दहेज के लिए आए दिन महिलाओं की हत्या हो रही है, रेप की घटनाओं के बढ़ते आंकड़े देखे तो मन विचलित होता है। भारतीय संविधान ने महिला व पुरुष को समानता का अधिकार दिया है, साथ ही हमारी सरकारों ने भी महिलाओं के लिए अनेक योजनाएं चालू की हैं, इसके बावजूद समाज में महिला-पुरुष को लेकर अनेक तरह के भेद-भाव बना दिए गये हैं और हर जगह महिलाओं को कमतर आंकने की कोशिश की गई है, यह महिलाओं के साथ अन्याय नही है तो और क्या है। 
 
संविधान, सरकार से लेकर सामाजिक संगठन तक में महिला सश+987क्तिकरण की बात तो होती है लेकिन महिला सशक्त नही हो पाई है। यह सत्य है कि महिला सशक्तिकरण तब तक संभव नही जब तक हमारे समाज के पुरुष प्रधान रवैये की में यह सोच पैदा न हो जाये कि महिला भी पुरुष से कम नही है साथ ही महिलाओं को भी अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा और अपनी कार्यक्षमता से अपनी शक्ति का, खुद के सशक्त होने का परिचय देना होगा। महिलाओं को दिखाना होगा की नारी सिर्फ भोग की वस्तु नही है बल्कि वह भी समाज का अहम हिस्सा है।  नारी को खुद को पहचानने की, अपने-आप को जानने की जरूरत Hain समाज का संतुलित विकास नारी के सशक्त होने पर ही सम्भव है।
 
 इस बात से भी हम इंकार नही कर सकते कि हमारी नारी शक्ति ऐसी व्यवस्था में रह रही हैं जहाँ महिलाओं को सशक्त बनाना आसान नही फिर भी महिलाओं को हर तरह से प्रयास करना होगा, क्योंकि यह कार्य मुश्किल जरूर है लेकिन न मुमकिन नही, इसलिए महिलाओं को शिक्षा तथा सोच से हर तरह से अपने-आप को सशक्त करने का समय आ गया है। महिलाओं को मानसिक रूप से मजबूत होकर खुद को अपने-आप को प्रस्तुत कर हर जगह शिखर पर स्थापित करना होगा, साथ ही सशक्त होने के लिए पुरुषों की सोच को भी बदलना होगा कि हम नारी आपसे कम नही हैं। परिवर्तन लाना जरूरी हैं क्योंकि नारी शक्ति को मुख्य धारा से जोड़े बिना विकास सम्भव नही है, इसलिए हर महिला को खुद से अपने घर से शुरुआत करनी होगी खुद को सशक्त बनाने की और अपने आस-पास की महिलाओं को भी जागरूक करना होगा, जागरूकता का माध्यम जो भी हो लेकिन खुद को सशक्त बनाने हेतु जागरूकता जरूर लाएं, साथ ही अपने अंदर निर्णय लेने की, नेतृत्व करने की क्षमता पैदा करें, साहसी बने, दृण निश्चयी बने, आत्म विश्वाशी बनें, क्योंकि नारी सशक्त होगी तभी हम देश और समाज के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना कर सकते हैं, एक सशक्त नारी के कन्धों पर ही संतुलित, स्वस्थ, विकसित समाज की नींव रख सकतें हैं। 
 
एक तरफ देवियों की पूजा अर्चना की जाती है तो दूसरी तरफ महिलाओं से दोयम दर्जे का व्यवहार कर भेदभाव किया जाता है। क्या यही महिला सशक्तिकरण है। नही, बिल्कुल नही यह सिर्फ छल है इस छल से बाहर आना होगा, महिलाओं को अपने-आप को खुद की शक्तियों को पहचानना होगा और आगे बढऩा होगा। 
 
इस पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों की सोच भी तुम्हे गई बदलना है, खुद को स्थापित करना है और साबित करना है कि हम भी पुरुषों से कम नही, बल्कि हम एक कदम आगे हैं। यह दिखाना होगा करके दिखाना होगा, अपना लोहा खुद मनवाना होगा,इसलिए जागों, जागरूक बनो, मजबूत बनो, आगे बढ़ो, सशक्त बनो। तभी सही मायने में महिला सशक्तिकरण का चिंतन साकार होगा, प्रयास पूरा होगा और एक नए भारत व स्वस्थ-संतुलित समाज का निर्माण होगा।
 
महिलाओ का आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्तिकरण
 
अगर आप अपने आत्मविश्वास , शिष्टता  ओर कौशल के आधार पर दुनिया की किसी भी चुनोती को सम्भालने में सक्षम हैं हर महिला को अपने अधिकारों को जानना होगा। व्यक्तिगत  लाभ को पहचानना होगा।नारी को बराबरी जा दर्ज मिलेगा तभी समाज जा विकास होगा।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भी समानता का अधिकार दे रही है।
 
 
शत  शत तुमको नमन नारी।

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