पिता मेरा सम्बल

पिता  मेरा सम्बल

पिता की सोच और पिता का प्यार बेटियों के लिए कितना अनमोल होता हैं आज सोचती हु तो लगता हैं कि पिता आज सच में मेरे लिए जीने का सम्बल हैं। आज मैं मजबूत हु तो सिर्फ पिता की वजह से। पिता हमेशा से मेरे लिए  फिकरमंद रहे मगर  मुख से कुछ न कहते। आज मुझे वो बचपन के दिन याद आते अपने हाथो से  मेरा हर कार्य करते। माँ हमे डाट भी देती तो पिता का दुलार हमे सब कुछ दे देता।   पिता पिता ने मुझमे और भाई में  कभी फर्क नहीं किया।  पिता ने बचपन से ही मुझे पढ़ाने पर जोर दिया !मैंने पिता से जीवन भर  सीखा वो किस तरह अपने उसूलो पर जिया करते हैं। बेटी पिता का अभिमान होती हैं वो अपने माता पिता से सिवाय प् यार के कुछ नहीं चाहती।  मैं अपने पिता की  ऋणी रहूंगी कि उन्होंने मुझे अच्छे संस्कार और अच्छी शिक्षा देकर  बड़ा किया।   

                                                       पिता ने  बनाया  बनाया मुझे सशक्त। पिता ने दी सीख मुझे स्वाभिमान  जीने की। पिता से सीखा मैंने निरन्तर संघर्ष कर आगे बढ़ना। पिता मानो पल में ही मेरी सारी तकलीफों को समझ जाते। पिता  से कह देती कभी मैं दर्द तो  मुस्कुरा देते और देते मुझे हिम्मत और  साहस। तब महसूस होता कि सच एक दिन मैं अपनी पहचान बना  लुंगी और जीत जाउंगी इस जहाँ से। पिता मानो।  मेरे लिए मेरी दुनिया हो।   पिता से ही मेरा हर लम्हा खुशियों से भर जाता।

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