बचपन हिंदी कविता|Hindi Poem

बचपन

याद आता वो बचपन
नहीं भूल  पाती वो दिन
जिन्दगी तेज गति से
यूँ ही चलती जा रही है।
सोचती हूँ तो याद आता
वो बचपन जो खो गया।।
पापा से जिद्द करना
माँ की ममता की छांव।
दादी से कहानियाँ सुनना
बाबा से झगड़ा हो गया।
वो बचपन जो खो गया।।
नानी  घर छुट्टी बिताना
नाना से मन की करना।
भूलूं पर मैं भूल न पाऊँ
रूठा  और मै  सो  गया।
वो बचपन जो खो  गया।।
गुड़िया एवं खिलौने  मांगना
मिट्टी से  दुनिया बसाना
हां कँहा खो गया वो बचपन
नई ख्वाईशें नए सपने
जो मन को लुभाते
हा बहुत याद आते।

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