महिला सशक्तिकरण परियोजना | बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। Women Empowerment Project Hindi Article

     महिला सशक्तिकरण परियोजना | बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
 
सशक्तिकरण’ से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है जिसमें वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके।
 
 रूपरेखा
 महिला सशक्तिकरण क्या हैं 
महिला सशक्तिकरण  क्यों होना चाहिए
महिलाओ से सम्बंधित उनकी समस्याओ से कैसे निकले। 
समस्याओ को दूरं करने के प्रभावी तरीके। 
प्रयास 
महिलाओ को समाज में सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक रूप से सुदृढ़ करने में सफलता। 
 
 
 भारत में महिलाओं के पिछड़ेपन के बहुत से कारण है जैसे लिंग आधारित हिंसा, प्रजनन स्वास्थ्य विषमताएं, आर्थिक भेदभाव, हानिकारक पारंपरिक प्रथाएं, असमानता के अन्य व्यापक और नियमित रुप। हमारे देश में महिला सशक्तिकरण के खराब प्रदर्शन का कारण लिंग असमानता है
 
 शिक्षा 
 लैंगिक समानता 
 रोजगार 
 सुरक्षा 
 स्वास्थय 
 दहेज़ प्रथा 
 कन्या भ्रूण हत्या 
 क़ानूनी परामर्श 
   अधिकारों के प्रति जागरूकता 
 
महिला सशक्तिकरण के लिए क़ानूनी परामर्श और जागरूकता। 
महिलाओ पर हो रहे सामाजिक घरेलु,आर्थिक और शारीरिक उत्पीड़न को रोकने हेतु। 
 
उद्देशय —  महिलाओ के विरुद्ध जो अपराध मुख्य रूप से बढ़ रहे हैं उनकोध्यान में रखकर योजना को प्रभाबी तरीके से क्रियान्वित करना। महिला और पुरुष के बीच की असमानता कई समस्याओं को जन्म देती है जो राष्ट्र के विकास में बड़ी बाधा के रुप में सामने आ सकती है। ये महिलाओं का जन्मसिद्ध अधिकार है कि उन्हें समाज में पुरुषों के बराबर महत्व मिले। वास्तव में सशक्तिकरण को लाने के लिये महिलाओं को अपने अधिकारों से अवगत होना चाहिये।नके उचित वृद्धि और विकास के लिये हर क्षेत्र में स्वतंत्र होने के उनके अधिकार को समझाना महिलाओं को अधिकार देना है।महिलाओ को उनके समस्त अधिकारों से  कराना ताकि वो जागरूक हो सके। और पीड़ित और  पिछड़े वर्ग की अशिक्षित महिलाये पुनः स्थापित हो सके।
घरेलु हिंसा, दहेज़ यौन शोषण,कन्या भ्रुण हत्या,देह व्यापार,एसिड घटना जैसी भयावह समस्याए जो महिलाओ को सशक्त बनने में बाधा डालती हैं इन पर समाधान खोजना ताकि महिलाओ को आज़ादी और न्याय मिल सके।
 
 
लक्ष्य  महिला विकास की योजना का लक्ष्य पूरे देश में महिलाओं के लिए सामाजिक और आर्थिक सुधार को लाना इस कार्यक्रम का मुख्य तंत्र महिला सशक्तिकरण प्रभावी बनाने के लिए महिला स्व-सहायता समूह को बढ़ावा देना था। वास्तव में महिला सशक्तिकरण लाने के लिए महिलाओं की गतिशीलता, सामाजिक संपर्क, श्रम पैटर्न, निर्णय लेने की क्षमता व पहुँच पर नियंत्रण और विभिन्न साधनों पर नियंत्रण के होने में परिवर्तन लाना चाहिए।
महिलाओं के खिलाफ पुरानी सोच को बदलना  और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लाये और लैंगिक असमानता को दूर  करना  ताकि महिलाये समाज और राष्ट्र में  सम्मान पा  सके। 
 
कार्य क्षेत्र
-पिछड़े वर्ग की महिलाये गांव की अशिक्षित महिलाये घरेलु कामकाजी महिलाये जिनको क़ानूनी  बेहद आव्यशकता हैं या जो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहती हैं। जिनका शारीरिक या आर्थिक्र रूप से उत्पीड़न हो रहा हैं उनकी समस्याओ को प्राथमिकता देनी मुख्य धेय रहेगा। 
 
कार्य प्रणाली।
महिलाओ में अपने अधिकारों के प्रतिजागरूकता लेन के लिए महीने में  एक बार क़ानूनी परामर्श शिविर का आयोजन करना ताकि महिलाये अपने अधिकारों से अवगत हो सके। इस शिविर में सामाजिक कार्यकर्ता,वरिष्ठ अधिवक्ता n g o से सदस्यों और कार्यक्रम संरक्षक का सहयोग लिया जाना अपेक्षित रहेगा।
 

कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के तरीके।

कार्र्यक्रम को सम्पन करवाने के लिए क़ानूनी और महिला अधिकारों से सम्बंधित संस्थाओ और सदस्यों से सेजुड़ाव ताकि उनके सहयोग से  कार्यक्रम को सार्थक और उपयोगी बनाकर महिलाओ के हितो के लिए बेहतर परिणाम प्राप्त किया जा सके। क्रायक्रम को प्रभावी बनाने के के लिए सेमीनार अवेयरनेस कैंप ,पोस्टर और बैनर के जरिये सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर प्रचार करना ,समाचारो के जरिये महिलाओ से सम्बंधित सभी अधिकारों को लोगो तक पहुँचाना। जनजागृति लाना। कामकाजी महिलाओ के द्वारा उनका प्रचार प्रसार करना। नाटक संगीत के माधयम से भी प्रचार करना।
 संस्थाओ से जुड़ाव —
-माहिलाओ के अधिकारों के लिए क़ानूनी परामर्श और जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए इन संस्थाओ का सहयोग अपेक्षित रहेगा।
महिला आयोग
महिला थाना
महिला हेल्प लाइन
सेल्फ हेल्प ग्रुप  और शिक्षण संस्थाये  जैसे स्कूल,कॉलेज व् कोचिंग सेंटर आदि।
 
पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले लैंगिक असमानता और बुरी प्रथाओं को हटाने के लिये सरकार द्वारा कई सारे संवैधानिक और कानूनी अधिकार बनाए और लागू किये गये है। । आधुनिक समाज महिलाओं के अधिकार को लेकर ज्यादा जागरुक है जिसका परिणाम हुआ कि कई सारे स्वयं-सेवी समूह और एनजीओ आदि इस दिशा में कार्य कर रहे है।महिला सशक्तिकरण का समर्थन, नीति निर्माण को बढ़ावा देने, लिंग संवेदनशील डाटा संग्रह को बढ़ावा देने, महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता में सुधार लाने और जीवन में अपनी स्वतंत्रता का विस्तार करने के लिए बहुत से निजी और सरकारी संगठन और संस्थाएं है।  अधिकारों के बावजूद, महिलाएं अभी भी आश्रित, गरीब, अस्वस्थ्य और अशिक्षित हैं। हमें इसके पीछे के कारणों के बारे में सोचकर और तत्काल आधार पर सभी को हल करने की जरूरत है।
 

एन जी ओ की भूमिका 

महिलाओ को सामाजिक आर्थिक और शिक्षा की दरहति से सशक्त बनाने पर जोर दिया जायेगा जो महिलाए हिंसा  और शोषण का शिकार हैं उन्हें पुनर्स्थापित किया जायेगा। उनके अंदर से योग्यताए तलाशना ताकि वो अपनी क्षमताओं को जानकर अपनी जिंदगी के निर्णय स्वयं ले सके। 
 लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण दोनों ही विकास और उच्च आर्थिक स्थिति को प्राप्त करने के लिए बदलाव ही महत्वपूर्ण रणनीति है।

 नीरा जैन।

 

 
 

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