महिला  साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान,जयपुर द्वारा लेखिका प्रीति जैन परवीन के कविता संग्रह ‘स्वप्नरंजिता’ का लोकार्पण

महिला  साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान,जयपुर द्वारा लेखिका प्रीति जैन परवीन के कविता संग्रह ‘स्वप्नरंजिता’ का लोकार्पण समारोह

 महिला  साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान,जयपुर द्वारा लेखिका प्रीति जैन परवीन के कविता संग्रह ‘स्वप्नरंजिता’ का लोकार्पण समारोह , जयपुर में देवर्षि कलानाथ शास्त्री ,श्री नन्द भारद्वाज,प्रो.अमला बत्रा,डॉ.राघव प्रकाश,स्पंदन अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू,डॉ.शीताभ शर्मा,द्वारा किया गया,सभी मंचस्थ अतिथियों का शानदार -सारगर्भित वक्तव्य रहा साथ ही स्पंदन सदस्यों ,रेणु शर्मा ‘शब्द मुखर’,कल्पना गोयल,स्मिता शुक्ला,मीनाक्षी माथुर,विनीता सुराणा ‘किरण’, रश्मि पारीक, ने प्रीति जैन की कविताएँ सुनाकर सभागार को स्पंदित कर दिया. कार्यक्रम का शानदार संचालन डॉ. रानी तंवर ने किया.कार्यक्रम में साहित्य जगत की प्रबुद्ध हस्तियाँ विराजमान थीं.
[: प्रीति जैन की।कविताये समाज की विडम्बनाओ ओर कुप्रथाओं का चित्रण करती है साथ ही मानवीय रिश्तों ओर जीवन मूल्यों की पड़ताल करती है।इस अवसर पर कलानाथ शास्त्री जी ने कहा कि महिलाओ के समाज और संस्कृति के निर्माण में जो योगदान है उसको नही भुला सकते सभी क्षेत्रों में उसने अपनी भूमिका बखूभी निभाई है । नंद भारद्वाज  जी का कहना था कि अपने जीवन के जो भी अनुभव है या आप किसी ओर के अनुभव को या कहानी को अपनी कलम से अभिव्यक्त कर सकते हो। हमे संवेदनशील होना होगा। सामाजिक सरोकार को  अपनी लेखनी का विषय बनाये। प्रीति जैन ने कहा कि ,” मैने अपने जीवन के सनुभवो को अपनी कलम के माध्यम से अभिव्यक्त  किया है ।और समाज मे फैली बुराइयों ओर विषमताओं को मैंने गहराई से देखा और अभिव्यक्त किया। डॉ  राघव प्रकाश ने कहा कि लेखन में  हमे शब्दो के आडंबर से बचना चाहिए ।

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