राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ |अंचल सृजन यात्रा वैर

 

राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से महान साहित्यकार रांगेय राघव की कर्मस्थली वैर में अंचल सृजन यात्रा के क्रम में आयोजित काव्य पाठ कार्यक्रम में सभी सहित्यकारो ने अपनी रचनाये पढ़ी मुझे भी काव्य पाठ करने का अवसर मिला।

राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से रांगेय राघव की कर्मस्थली वैर में आयोजित रचना पाठ कार्यक्रम में अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। रांगेय राघव को समर्पित इस आयोजन में भरतपुर के वरिष्ठ साहित्यकार अशोक सक्सेना ने रांगेय राघव के जीवन और रचनाकर्म को लेकर कई दिलचस्प संस्मरण सुनाए। चर्चित कथाकार चरण सिंह पथिक ने रांगेय राघव की प्रसिद्ध कहानी “गदल” की पात्र गदल के गांव की खोज और इस कहानी की मानीखेज अंतर्कथा सुनाई। विख्यात आलोचक राजाराम भादू ने ब्रज क्षेत्र के सांस्कृतिक और प्रगतिशील आंदोलन पर रोशनी डाली। कृष्ण कल्पित ने अंचल सृजन यात्रा की अंतर्दृष्टि और रांगेय राघव के रचनाकर्म को रेखांकित किया। वैर के युवा लेखक बालकिशन और किशोर श्रेयांस पाठक ने रांगेय राघव पर लिखे गीत तरन्नुम में सुनाए।
इस अवसर पर रांगेय राघव की पत्नी सुलोचना रांगेय राघव का भेज गया आत्मीय संदेश पढ़ कर सुनाया गया। रांगेय राघव के समकालीन रामकृष्ण शर्मा ने भी भरतपुर से एक संदेश भिजवाया, जिसे जीसी बागड़ी ने पढ़ कर सुनाया।
जयपुर से आए लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ ने अंचल सृजन यात्रा पर विपरीत टिप्पणियां करने वालों के लिए एक शे’र पढ़ा-

नहीं देख पाते अगर,
आंखें कर लो बंद
चमगादड़ को रोशनी,
आती नहीं पसंद

इसके अलावा कैलाश मनहर, भागचंद गुर्जर, कविता माथुर, नीरा जैन, शाइस्ता महज़बीं, मीनाक्षी माथुर और चित्रा भारद्वाज के साथ ही भरतपुर के रचनाकार रेणु दीपक, अर्चना बंसल आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। अध्यक्षता की वैर के साहित्यकार देवेंद्र पाठक ने और कार्यक्रम का संचालन प्रेम चंद गांधी ने किया

रांगेय राघव के समकालीन रामकृष्ण शर्मा ने भी भरतपुर से एक सन्देश भिजवाया जिसे जी सी बागरी जी ने पढ़ कर सुनाया
लोकेश कुमार सिंह साहिल जी से अच्छे शेर सुनने को मिले ।सहित्यकार श्री रांगेय राघव जी के हस्तलिखित कुछ पत्र ,जो उनके मित्र आदरणीय श्री अशोक सक्सेना ने यहाँ दिखाये, और जिनमें से एक में वह गणेश नामक मित्र को गणेश जी का चित्र बनाकर संबोधित कर रहे हैं….व साथ ही निमंत्रण के उत्तर मे आदरणीय तलवार सर को लिखा गया आदरणीया सुलोचना रांगेय राघव जी का पत्र , जिससे ज्ञात हुई ये बात कि वो वैर को नालंदा सी तपोभूमि बनाने का स्वप्न देखते थे।राजस्थान की धरती को अपनी रचना स्थली बनाने वाले रांगेय राघव ने हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयां दीं। उनका अप्रतिम रचना संसार है। उन्होंने लगभग 40 वर्ष की ही उम्र पाई और एक से बढ़ कर एक, कोई 150 पुस्तकें रच डालीं, जो आज हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। अफ़सोस यह कि ऐसे महान लेखक को, औरों को छोड़िये, राजस्थान में ही कोई कभी याद नहीं करता। मूझे इस सृजन यात्रा का हिस्सा बनकर बहुत कुछ सीखने को मिला।
आभार लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ जी ,Gc Bagri जी, प्रेम चंद गांधी जी, सत्येंद्र कुमार जैन जी,कृष्ण कल्पित जी, चरण सिंह पथिक जी रमेश शर्मा जी ।

 

 

 

neera jain jaipur

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *