शाम ए सुखन महिला काव्य गोष्ठी women empowerment Jaipur

शाम ए सुखन महिला काव्य गोष्ठी women empowerment Jaipur

                                                 
 कविता एक सतत प्रक्रिया है जो समय के दो पहियों पर चलती हुई मनुष्य को छूती है,सहलाती है, बहलाती है, कुछ सुनती है ,सुनाती है ,देखती है ,दिखाती है ।आगे बढ़ती चली जाती है ।कविता बस  कविता होती है ।वह अच्छी या बुरी नहीं होती  अपना पराया नहीं होती।वह  होती है तो अपने होने का  आभास दिलाती है ।यह समय का सच बनकर लुभाती है। देश को जगाती है।  काल जो सजाती है ।परिस्थितियों को बनाती बनाती और सृजनकार को डूब जाने को कहती है। 
       
 कभी अनायास ही  शब्दों के मोती झड़ने लगते हैं और सुख- दुख के अनुभव का शाब्दिक गुलदस्ता तैयार हो जाता है।
बहुत सी काव्य गोष्ठियों में जाने का अवसर।मिलता रहता है  ओर बहुत से साहित्यिक  ओर सांस्कृतिक संस्थानों से जुड़ी हुई हु
 रक बहुत ही अच्छा कार्यक्रम महिला काव्य गोष्टी शाम ए सुखन में मुझे काव्य पाठ खुद को अभिव्यक्त करने का अवसर मिला । के के सैनी जो बहुत बहुत  अच्छे इंसान है ओर बहुत अच्छा लिखते है उन्होंने ही इस कार्यक्रम को आयोजित किया था: जयपुर से बहुत से रचनाकार कवियित्रियो को उनकी बेहतरीन रचनाओं को सुनने को मिला जो सामाजिक सरोकार को लेकर थी
: मीनाक्षी माथुर, शाइस्ता मेहजबीन ,निरुपमा चतुर्वेदी, चित्रा भारद्वाज ने बहुत उम्दा रचनाये सुनाई
सभी महिलाओ कवियत्री ने समा बांध  दिया और माहौल को खुशगवार बना दिया। कार्यक्रम में बहुत से सुधि स्रोता थे जो सभी को अच्छे से सुन रहे थे ओर उनसे परिचय भी हुआ ओर सच कह तो सभी से वहाँ इतना सम्मान मिला जो सोच भी नही सकती। मैने महिला सशक्ति करण पर अपनी कविता  प्रस्तुत की 

जग जननी जग पालक हो

न कभी किसी से हारी हो

तुम नारी हो तुम नारी हो

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