संरक्षण हो  पर्यावरण  का | हिंदी कविता

संरक्षण हो  पर्यावरण  का  
पर्यावरण की दुख भरी चीख
बरसायेगी कहर
दूषित हवा हमारे

लिये  होगी जहर

चाहत-hindi-poetry
chahat
उतार फेंको छद्म आवरण 
संरक्षण करौ पर्यावरण 
 
चहुं ओर फैला
वायू जल ध्वनि प्रदूषण 
बीमारियों को देता आमंत्रण 
क्षीण होता शरीर प्रतिछण
सूखा बाढ ओला
प्राकृतिक प्रकोपों
का कारण है प्रदूषण 
 
प्रदूषण है धरती का भार
स्वच्छ पर्यावरण है
जीवन का मूल आधार
अंधाधुंध काट पैड
बिगाडा  प्राकृतिक संतुलन 
उजाडौ मत वन उपवन
करो वन की रक्षा
होगी पर्यावरण सुरक्षा 
 
लगाकर पेड करो रक्षा पर्यावरण 
करो हरित बातावरण
प्रदूषण पर करो नियंत्रण 
पर्यावरण बचाने का लो प्रण
तभी होगा मानव कल्याण 
बचेगें जन जीवन के प्राण
 
पर्यावरण पर हर नागरिक दे ध्यान
स्वच्छता का नित नया हो सौपान
जन जागृति सै आयेगा नया प्रभात
प्रदूषण जड़ सै होगा समाप्त 
 
पेड लगा उगायेंगें नये जंगल 
तब जीवन में आयेगा
आनंद मंगल
हरियाली सै धरती का करेंगे श्रृंगार 
स्वच्छ  पर्यावरण 
नई पीढी को देंगें उपहार
स्वस्थ जीवन की यही है रीति
स्वच्छ वातावरण नाचे प्रकृति
स्वर्ग से सुंदर हो धरती 
पर्यावरण संरक्षण सच्ची ईश्वर भक्ति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *