सफलता प्राप्ति के लिए -हमें अपने लक्ष्य के प्रति आत्म समर्पित| motivational

कदम बढ़ा तू ऐ मुसाफिर,
 मंजिल तू पा जाएगा ।
 हौसला गर है दिल में तेरे ,
वह दिन  भी करीब आ जाएगा ।
होंगे सपने तेरे पूरे ,
 जो संकल्प लिए हैं तूने।
 जोश के साथ जब तू आगे बढ़ेगा ,
किस्मत का दरवाजा तभी खुलेगा ।।
जब हम अपने आसपास किसी सफल व्यक्ति को देखते हैं या उसके बारे में पढ़ते हैं तो हमारे अंदर की चेतना स्वतः  जागृत हो जाती है कि मुझे भी अपनी मंजिल पानी है ,अपने जीवन को सफल बनाना है ।और हम एक जोश के साथ अपने कार्यों को नियोजित करने लगते हैं। तथा कुछ  दिन उस पर सक्रिय भी रहते हैं, परंतु कुछ दिनों बाद हमारा जोश धीरे-धीरे कम होने लगता है। क्योंकि सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ना प्रत्येक के बस की बात नहीं है। हमारे आसपास का वातावरण सदैव हमें प्रभावित करता रहता है लोगों के विचार कभी-कभी हमें यह अहसास दिलाते हैं कि यह तुम्हारे बस की बात नहीं है। इससे अच्छा आप यह करो यह तुम्हारे लिए  ज्यादा सही रहेगा। हमारा जोश धीरे-धीरे कम होने लगता है ।और जिसे हम कहते हैं आत्मविश्वास की कमी होना और हम अपनी किस्मत को दोषी मानकर हालातों से समझौता कर लेते हैं।
 व्यर्थ की बातों में ना पड़ना,
 जीवन का एक लक्ष्य साधना ।आत्मशक्ति का करके संचार ,
सफलता का इतिहास रचना।
 सफलता प्राप्ति के लिए आवश्यक है —हमें अपने लक्ष्य के प्रति आत्म समर्पित होना तथा उसके लिए  अथक परिश्रम की आवश्यकता होती है ।परिश्रम तभी सार्थक होता है जब हमारे आंतरिक गुण हमें निरंतर प्रेरित करते रहें और वह आंतरिक गुण क्या हैं? 
वे बिंदुवार  प्रस्तुत हैं—–
1— किसी भी सफलता का मूल मंत्र है —*आत्मबल को बनाए रखना* यदि आपका मनोबल ऊंचा है तो आप अपने लक्ष्य से कभी डिग भटक नहीं  सकते ।

2–सफलता की दूसरी कुंजी है —-*आपका आचरण* क्योंकि आचरण ही सफल व्यक्ति को महान बनाता है ।इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्म (आचरण) से महान बनता है।

 3—सफलता की तीसरी कुंजी है– *लगनशीलता* यदि आप किसी भी कार्य को सार्थक रूप से पूर्ण करने के लिए तत्पर नहीं होंगे तो वह कार्य स्वयं बाधित हो जाएगा। जिससे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थ रहेंगे।
4– सफलता की चौथी कुंजी है—

*समय का सदुपयोग* समय प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान होता है और यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम समय का उपयोग किस प्रकार करते हैं यदि हम अपने लक्ष्य के प्रति जागरुक है तो समय की कीमत हमें स्वयं ज्ञात  होगी और हम उसका सदुपयोग अवश्य करेंगे।

 5–सफलता की पाचवीं कुंजी है –*मनन व  अभ्यास* यदि हम कोई चीज सीख रहे हैं तो उसमें हमें निरंतर ?अभ्यास की आवश्यकता होती है और कहां क्या कमी हो रही है इस बात पर भी लक्ष्य साधना आवश्यक हो जाता है इस प्रकार हमारे द्वारा जाने अनजाने हुई त्रुटियां भी  हमें बहुत कुछ सिखाती हैं और हमारे लिए सफलता का मार्ग प्रशस्त करती हैं ।
6– सफलता की छठी कुंजी है— *एकाग्रता* यदि हम अपने लक्ष्य के प्रति मानसिक और भावनात्मक रूप से सक्रिय हैं तो सफलता का मार्ग हमें स्वतः ही दृष्टिगोचर होने लगता है।
 सफलता की सातवीं कुंजी है—- *सफल व्यक्तियों के संपर्क में रहना* हम जिस प्रकार के व्यक्तियों के साथ रहते हैं हमारा आचार व व्यवहार  उन्ही जैसा हो जाता है बुरे लोग हमें अपने लक्ष्य से भटकाते हैं तो सफल व्यक्तिष  हमारे अंदर ऊर्जा का संचार करते हैं तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
     यद्यपि लक्ष्य प्राप्ति हेतु कठिन परिश्रम की आवश्यकता होती है परन्तु ये आंतरिक गुण भी सफलता के द्वार खोलते  हैं । 
अंत में कुछ पंक्तियों द्वारा मैं अपनी बात समाप्त करना चाहूंगी—-
 दुनिया भी उसकी दीवानी ,
जो सफलता के शिखर पर हैं चढ़ते।
 जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में ,
अपनी इबारत खुद है लिखते ।
दृढ़ निश्चय और संयम से,
 स्वावलंबी जब तू बन जाएगा।
सफलता का रहस्य क्या होता है ,
तब तुझे समझ आ जाएगा।।

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