समानांतर साहित्य उत्सव |साहित्य के विभिन रंगों से  सरोबार रहा Jaipur

 समानांतर साहित्य उत्सव

साहित्य के विभिन रंगों से  सरोबार रहा।

प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से अयोजित समानांतर साहित्य उत्सव का आयोजन  रविन्द्र मंच पर 27 28 औऱ 29 जनवरी को किया गया । उदघाटन सत्र में पत्रकार लेखक ईश मधु तलवार की पुस्तक राजकमल प्रकाशन से  प्रकाशित हुई रिनाला खुर्द का विमोचन किया गया
बहुत ही शानदार सत्र सभी मंच पर हुए इसमे राजस्थान से ही।नही भारत और बाहर के देश नेपाल के साहित्यकार ओर कवियों ने भी शिरकत की।
मराठी की दलित प्रगतिशील  परंपरा सत्र में मराठी साहित्य के अनुवादक  शरण कुमार लिम्बाले जी का सत्र बहुत बेहरारीन रहा ।एक सत्र ज़िंदानामा सीमा आज़ाद की जेल डायरी पर राधाकांत सक्सेना विश्व विजय  ए  आर नियाजी ने चर्चा की। सीमा आज़ाद ने किताब लिखने के दोरान जेल में महिला कैदियो जुड़े अनुभव पर प्रकाश डाला।
अनुवाद में कविता पाठ  पर यागवेन्द्र जी ने बहुत ही सार्थक हिंदी में  अनुवादित कविता पाठ किया जो बेहद प्रभावित रहा ।
 लेखक मुरुगन के बारे में भी उन्होंने चर्चा की ।
राग दरबारी पांडाल में असमिया कवियों का काव्यपाठ सुनकर स्रोता अभिभूत हुए। कन्हैया लाल सेठिया मंच पर नेपाली कविता पाठ हुआ । सरिता तिवारी, अभय श्रेष्ठ, केशव सिलवाल, रीमा के सी, प्रमोद धिताल, निभा शाह, विधान आचार्य द्वारा कन्हैयालाल सेठिया मच पर वहाँ उपस्थित सभी जन के दिलो को छू गई कविता। नेपाली कवि ने हिंदी में प्रेम प्रकति सामाजिक अधिकारों ,जीवन की विसंगतियों पर ओर  संवेदनाओं से परिपूर्ण कविता प्रस्तुत की। इतिहास  और मिथक के विरोधाभास पर इतिहासकार रीमा हूजा  ने  बहुत अच्छी चर्चा की मोडरेट किया रति सक्सेना ने।
एक सत्र में प्रख्यात गीतकार इरशाद कामिल ने अपने गीतों की सृजन प्रक्रिया के बारे में प्रकाश डाला वही पर कविताओं इर कहानियों का आयोजन स्थल पर अलग अलग मंचो पर निरंतर पाठ चलता रहा।हिंदी कविता पाठ में विनोद पदरज और टीकम चंद बोहरा ने बेहतरीन रचनाये सुनाई टीकम चंद बोहरा ने लोकतंत्र पर सार्थक रचना सुनाई ।कन्हिया लाल सेठिया  मंच  पर उर्दू शायरी का सत्र हुआ जिसमें लोकेश कुमार सिंह साहिल ओर दिलदार देहलवी ने खूबसूरत समा  बांध दिया ।।   समानांतर साहित्य के दूसरे दिन सुबह  हरहरहरण जोशी के सितार वादन पर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए
  समानान्तर साहित्य उत्सव में तीन दिन न जाने कब कैसे निकल गए पता ही नहीं चला शब्दों से गुलज़ार हुआ रजिया ग्राम | हर तरग शब्दों का जादू बिखर रहा था कन्हैया लाल सेठिया मंच पर
हिन्दी कविता और  संवाद का सत्र शानदार रहा  वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना  चंबल  पर अपनी कविता सुनाते हुए स्वयं भाव विभोर हो गए और उनकी आंखें अश्रु से भर गई। चंबल पर कविता के बारे में उन्होंने कहा कि ये उनकी कविता नही  चंबल की बेटी की कविता है। इसी मंच पर एक  अन्य सत्र फेसबुक ओर मिथ्या चेतना रहा जिसमे अविनाश  त्रिपाठी ने प्रसिद्ध लेखक अशोक।पांडेय के साथ चर्चा की।।
हिंदी  कंहानी पाठ सत्र शानदार रहा इसमे सत्यनारायण कहानीकार चरणसिंह पथिक ने कहानी पाठ किया संयोजन रजनी।मोरवाल ने  किया।
नवोन्मेष  मंच एक युवाओं के लिए  बनाया गया जहाँ स्कूल कॉलेज के बच्चे युवा अपनी प्रतिभा  लेखन और संगीत की।प्रस्तुत कर सके और इस मंच का संचालन किया नरेश प्रजापति नाश ने।

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