सावन से जुडी यादें Hindi Article Life Motivational

 

सावन से जुडी यादें

 
सखी री सावन मन भाये
याद पिया की।आवे 
पिया  परदेश भये
जी मोरा भरमाये
सखी याद पिया कीआवे
अब  मोहे सावन न भाये
सावन की घटाये 
बहारे  बनके छाए
हरी भरी धरती सुंदर
सबके मन को लुभाये
इस मौसम को छोड़ कर
बहारे  भला कहाँ जाये
सतरंगी समाओ से भला 
पीछा  कैसे छुड़ाये
प्यासी सुखी धरती पर
जान छिड़क सी जाये
सावन की घटाये
बरखा  बनके छाये
मन कितना कच्चा हो जाता है सावन में। बूँदों की अठखेलियाँ, पकौड़ों की भीनी खुशबू और अंतर में उमड़ती….पिया की छवि
: मौसम के जादू से कोई अछूता नहीं रह पाता। सावन की यह बहार अपने संग ले आती है भावनाओं में सराबोर कुछ अनकही कहानियां.. काले-काले मेघ देखते ही मोर जहां अपने पंख फैलाकर खुशी जताता है। वहीं, तपती धरती पर बरसती बूंदें वातावरण में सोंधी खुशबू बिखेर देती हैं। सखियां झूला झूलते हुए कजरी का आनंद लेती हैं।। जी हां, कुछ ऐसी ही खासियत है ‘सावन’ ऋतु की। जिसके आते ही पशु-पक्षी ही नहीं प्रकृति भी खुशी से झूम उठती है। कजरी लोकगीत का जिक्र आते ही पूर्वी उत्तर प्रदेश की परंपराएं और रीति-रिवाज सजीव हो उठते हैं। छम-छम बरसती बूंदों के बीच झूलों पर ऊंची-ऊंची पींगें, सखियों का हास-परिहास, सास-ननद के ताने-उलाहने, पिया से रूठना-मनाना, सब कुछ शामिल होता है इन लोक गीतों में।  हालांकि, ‘सावन’ तो आज भी वही है, पर इसे मनाने के तौर-तरीकों में आधुनिकता के रंग भी शामिल हो गए हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद महिलाएं इस परंपरा को जीवंत किए हैं। यही वजह है
[ जी हां, कुछ ऐसी ही खासियत है ‘सावन’ ऋतु की। जिसके आते ही पशु-पक्षी ही नहीं प्रकृति भी खुशी से झूम उठती है। कजरी लोकगीत का जिक्र आते ही पूर्वी उत्तर प्रदेश की परंपराएं और रीति-रिवाज सजीव हो उठते हैं। छम-छम बरसती बूंदों के बीच झूलों पर ऊंची-ऊंची पींगें, सखियों का हास-परिहास, सास-ननद के ताने-उलाहने, पिया से रूठना-मनाना, सब कुछ शामिल होता है इन लोक गीतों में।  हालांकि, ‘सावन’ तो आज भी वही है, पर इसे मनाने के तौर-तरीकों में आधुनिकता के रंग भी शामिल हो गए हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद महिलाएं इस परंपरा को जीवंत किए हैं। यही वजह है
: सावन से मेरी बहुत यादे जुड़ी सखियों के साथ मिलकर सेलिब्रेट करना सतरंगी लहरिया पहनना
झूलों ओर बरसात का आनंद लेना मानो सावन में मन उत्साह से भर जाता है और मन का मयूरा नाच उठता हैं और चारो तरफ की हरियाली देखकर मन चहक उठता हैं
neera jain jaipur

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