महिला  सशक्तिकरण |Women Empowerment poem

महिला  सशक्तिकरण

 

मैं अकेला ही चला था जानिब ए मंज़िल मगर लोग आते गये और कारवाँ बनता गया  किसी  शायर ने  क्या खूब लिखा है 

महिलाओं का जो भी सुधार और सशक्तिकरण हुआ है वह विशेष रूप से उनके अपने स्वयं के प्रयासों और संघर्ष के कारण हुआ है  ऐसा ही महिलाओ के हित मे  सार्थक ओर सामूहिक वैचारिक  प्रयास प्रबुद्ध महिला मंच से जुडी महिलाओ द्वारा किया गया ।महिला मंच द्वारा  रविवार कोकॉफी कैफ़े में  आयोजित काव्य  गोष्टी में शकुंतला शर्मा ,नीता ,उर्वशी चौधरी ,ज्योति पारीक कविता मुखर ज्ञानमती सक्सेना जी से बेहतरीन रचनाये सुनी और  वो रचनाये ही नही बल्कि महिलाओ के लिए सकारत्मक बदलाव का सूचक थी ।महिला सशक्तिकरण मतलब महिलाओ की उस क्षमता से है जिससे उनमे ये योग्यता आ जाती है जिसमे वे अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय ले सकती है.  महिलाओ के अधिकार सम्मान ,समानता ,घरेलू हिंसा ,महिलाओ की आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर सभी महिलाओ ने अपने विचार रखे बल्कि उन पर शीघ्रता से कार्य और समाधान की गहराई से बात की।  प्रभुद्ध महिला मंच से जुड़ी सदस्य महिलाओ ने महिला सशक्ति करण पर  ने एक स्वर में महिलाओ के मुद्दों व उनके विकास की आवाज उठाई । पूजा पवन कुमार ने आधी आबादी को आगे बढ़ाने ऒर वे सही अर्थों में सशक्त बने सबके सामने अपने विचार प्रमुखता से रखे।मैं भी इस मंच  का हिस्सा बनी  ओर जुड़ी  मेरे लिए  गौरव की वात है। ।महिला सशक्तिकरण की सोच न केवल महिलाओं की ताकत और कौशल को उनके दुखदायी स्थिति से ऊपर उठाने पर केंद्रित करती है बल्कि साथ ही यह पुरुषों को महिलाओं के संबंध में शिक्षित करने और महिलाओं के प्रति बराबरी के साथ सम्मान और कर्तव्य की भावना पैदा करने की आवश्यकता पर जोर देती है

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