झुन झुन कटोरा : महान संत मौलाना हसन या भिश्ती का मकबरा ! Historical Travel

झुन झुन कटोरा : महान संत मौलाना हसन या भिश्ती का मकबरा !

 

 

 

———–झुन झुन कटोरा : महान संत मौलाना हसन या भिश्ती का मकबरा !

आगरा के जिलान्यायालय परिसर में स्थित ‘झुन झुन कटोरा’ का मकबरा या भिश्ती का मकबरा है. चर्चा यह है कि यह उस निजाम नाम के भिश्ती का मकबरा है, जिसे मुग़ल बादशाह हुमायूं ने एक दिन के लिए बादशाहत दी थी. बताते हैं कि हुमायूं जब शेरशाह सूरी से जंग हार गया और अपनी जान बचाने के लिए घोड़े पर सवार होकर भाग रहा था, रास्ते में एक नदी आई थी, जिसमें उसका घोड़ा डूब कर मर गया. तब निहत्थे हुमायूं को निजाम भिश्ती ने अपने मशक के सहारे नदी पार कराया था.

बाद में जब हुमायूं दोबारा शासन में आया तो उसने निजाम की खोज खबर करवाई और वह मिल भी गया. उसकी इच्छा पर उसे ढाई दिन के लिए बादशाह बनाया गया. निजाम भिश्ती ने अपने मशक के टुकड़े कटवा कर सिक्कों के रूप में जारी किया. मुग़ल कालीन इतिहास में इस मजेदार घटना को अहसानमंदी के रूप में लिखा गया है. अकबरनामा में भी इसका जिक्र है.

निजाम की मृत्यु के बाद उसको इज्जत बख्शने के लिए उसका गोल गुम्बज वाला एक छोटा सा मकबरा बनवाया गया. तब वहां आने जाने वालों के पीने के लिए एक मशक में पानी भर कर रखा रहता था. पानी पीने के लिए एक चांदी का कटोरा रखा रहता था. लोग भेंटस्वरूप कटोरी में कौडियाँ डाल जाते थे, जो कि कटोरा हिलाने पर झुनझुने की तरह बजते थे. इसीलिये लोगों की जुबान पर झुन झुन कटोरा नाम चढ गया.

इसके विपरीत पुरातत्व विभाग का कहना है कि यह मकबरा पर्शिया में जन्मे महान इस्लामिक संत मौलाना हसन का था जो सिकंदर लोदी और सलीम शाह सूरी के समय में आगरा में निवास करते थे. इस गुम्बद पर पर्शियन भाषा में अभी भी कुछ अस्पष्ट इबारत लिखी दिखती हैं.

ईंट और चूने से बना और प्लास्टर हुआ यह षष्टकोणीय मकबरा उस इस्लामिक विद्वान की स्मृति में बना था जिनका सन १५४६ में देहावसान हुआ था. यह तथ्य वहां अभी भी अंकित है. जिला न्यायालय, आगरा के सूर्य नगर कालोनी की ओर के गेट पर स्थित है यह मकबरा, न कि मुख्य गेट के पास. इसलिए कभी जाना हो तो उसी गेट से जाएँ.

साभार।      राज गोपाल सिंह वर्मा

picture credit  Raj Gopal Singh Verma

 

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