अनोखा अहसास

सुनो।प्रिय 
हाथ मे हाथ तुम्हारा
देता एक अनोखा अहसास
नही लगते अजनबी
लगते अपने 
होते जब साथ
होती निशब्द 
जब होते तुम साथ
देते एकं संबल
दिल मे उठते जज्बात
इश्क में  डगमगाते कदम
जब होते तुम साथ
देख एक दूसरे को
नज़रो से करते बात
निशा भी ओढ़ती चुनरी 
होते  जब तुम साथ
neera jain