तुम कुछ भी कहो  

तुम कुछ भी कहो                                         
किसी को डाँटो 
नफरत करो 
प्यार करो 
पर मैं चुप रहु 
कुछ न बोलूं 
मुँह न खोलू 
पर तुम्ही बताओ 
मैं कैसे जीऊ 
कैसे करू अपना 
 दर्द बयान 
 कब मिलेगा  मुझे 
समान रूप से जीने 
का अधिकार। 
तुम्ही कहो कब होगा 
सुन्दर आकार,
किसी साकार कलाकृति का 
इसी उम्मीद में जी रही हु 
कि कभी तो भरूंगी 
मैं खुले आसमाँ में 
उड़ान। 
खुशियों से महकाएगा जीवन 
जीने की प्यास और 
जगायेगा मन मैं विश्वास। 
पूरा हैं भरोसा एक दिन 

जरूर आयेगा