उम्मीद

खोज रही हु वो सारी  बाते 

वो सारे जज्बात 

जो तुमसे जुड़े हैं। 

सोच रही हु। 

वो अनोखा रिश्ता 

जो मेरा तुमसे बना हैं। 

सोच रही हु वो किस्मत 

की लकीरे 

जो मेरी  तुमसे जुडी हैं। 

सोच रही हु कि 

मुझको तेरी तलाश क्यूँ हैं। 

अब टूट गई सारी  उम्मीदे 

फिर भी दिल में 

एक आस क्यू हैं। 

हां खोज रही हू सारी बाते

वो  जज्बात जो तुमसे जुड़े हैं। 

जाग रहे मन  में अहसास 

बुन रही नए ख़्वाब जो 

मिलकर देखे  थे। 

सोच रही हूँ मैं तुम्हारा और 

मेरा रिश्ता जो समंदर 

से भी गहरा 

नभ सी ऊंचाई लिए 

हां सोच रही तुम्हारा और 

मेरा प्यार जो पाक हैं। 

दूआ बनकर मेरी रूह में 

उतर गया 

हां सोच रही हू मैं 

तुमको  दिल से 

निखर रही हु सँवर रही हूं 

तुम्हारी यादो के साथ 

बढ़ती जा रही हूँ। 

एक नई मंज़िल की 

तरफ एक उम्मीद लिए 


नीरा जैन

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