खवाहिश - Hindi Poem

खवाहिश – Hindi Poem

वक्त बस गुजर रहा था। 

कोई खवाहिश नहीं

जो पूरी हो सके। 

कोई ख्वाब नहीं जिसके लिए 

जाग सकू। 

मानो  एक ही शाख पर जिंदगी 

गुजर रही थी। 

कोई फितूर भी नहीं कि 

परवाज दू अपने आपको कभी। 

मैं बह रही थी वक्त के साथ। 

और एक दिन अचानक तुम,

आ धमके यू ही,

एक हवा के झोके की मानिंद 

और साथ लेकर आये तुम 

बहुत सारे ख्वाब। 

मानो यूँ लगा जैसे मेरे सपनो को 

पंख मिल गये  हो। 

और मै भरने लगी एक ऊँची उड़ान 

में मिल पायी खुद से 

जीवन की राह हुई आसान 

बना रही अपनी एक नई पहचान।


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