दर्द

       

दर्द

से मेरा सामना हो गया

हां वह दर्द मेरे ही अश्रु को
 चुपचाप पी गया हां मेरे आंसुओं
को देख वह भी मौन हो गया
हां सांग मेरे वह भावविभोर हो गया
दर्द मुझसेहने लगा मुझ पर भरोसा
 करो क्रंदन तू क्यों करती है ,
साया हमेशा बना रहूंगा
तेरा आजीवन साथ निभाऊंगा
 मेरी छत्र छाया में रह तू
तपस्विनी से ऐसा जीवन होगा
क्षणभंगुर है इच्छा जान
नहीं तुम्हें डूबने दूंगा
जब नींद खुली विस्मित थी सोचती
रही क्या दर्द भी किसी का
जीवन साथी होता