पिता मेरे गुरु है सर्वस्व है मेरे

cमेरी ताकत है सम्मान है मेरी पहचान है।

पिता की हमेशा ऋणी रहूंगी आज मेरी पहचान मेरी खुशी मेरा अस्तित्व उनकी वजह से है पिता की हर बात एक सुझाव हर हाँ के हर ना के सभी मायने समझ मे आ रहे है। पिता अपने बच्चो की बांहे थामे स्कूल कॉलेज कोचिंग क्लास यहाँ तक परीक्षा केंद्र भी ले जाते है
परिंदों के बच्चे घोसलों से फेके जाने पर ही उड़ना सीखते है न किन कि उनके कंधों पर बैठकर सैर करने से।।।पिता स्वय में एक ऐसा शब्द है जो पूर्णता का घोतक है पिता जीवन के सरपंच है अपने बच्चो को नेक राह पर चलने की प्रेरणा जोदेते है जो ममता का अनजाना ऒर अनदेखा रूप होता है जिनकी गैर मौजूदगी बहुत कुछ बयान कर देती है बहुत दूर जाना पड़ता है पिता से पिता जैसा होने के लिये
जीवन देने वाले माता पिता का गुरु से ज्यादा महत्व है क्योंकि  गुरु ही उसी शरीर मे उपलब्ध हुये है जो मुझे मेरे माता पिता से मिला है सुनहरी धूप में खुद को तपा हमे कच्ची मिट्टी से मजबूत साँचे में ढाला है वो है पिता ख़ुद के पेट को काट जिसने हमारे पेट को भरा दर्द में मजबूती के साथ हमारा हाथ थामा जिसने हमे हिम्मत और सहारा दिया हमारी जिंदगी को।संवारा मेरे लिए बस वो ख़ुदा है बस वो मेरे पिता मेरे पिता मेरी ताकत है सम्मान है मेरी पहचान है
गुरु हमारे जीवन मे होते है तो हमारे जीवन को एक राह मिल जाती है मेरे पिता को मैने अपना गुरु माना है उनके दिये संस्कारो से ही मैं आगे बढ़ी हूँ बहुत कुछ मैं अपने पिता जैसी हूँ उनका अक्स हूँ
पिता आम आदमी की तरह रहते है आज मैं यह कह सकती हूं मेरे पिता की खास आदत यह है कि वे आम आदमी की तरह रहते है साधारण दिखते है वो भीड़ में नज़र आना नही चाहते आम आदमी की बेटी हूँ मेरे पिता की यह पहचान उनको अलग बनाती है। वे एक ऐसा छायादार वृक्ष है जो धूप में खड़े होकर अपने परिवार को सुखद छाया देते है।