बेटियों के प्रति लापरवाही क्यों?

हमारे समाज और परिवार में आज भी हमारी  बेटिया सुरक्षित  गई हैं यह हम सभी के लिए गंभीर विषय हैं। बेटियों के जीवन और और  भविष्य के लिए हम जरा सी गहराई से नहीं सोचते हैं। आये दिन उनके साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म की घटनाएं होती रहती हैं। क्या हम सभ्य समाज में रह रहे हैं ये प्रश्न सभी के लिए हैं। एक और तो आये दिन हम कन्या भ्रुण हत्या के बारे में सुनते  रहते हैंजो हम सभी के लिए बेहद शर्मनाक हैं। हम जनम से पहले बेटियों को  मार रहे हैं और अगर ऎसा नहीं कर पाते हैं तो पैदा होने  बाद कचरे  ढेर में फक देते हैं वही पर दूसरी और छेड़छाड़ और बलात्कार दहेज़ हत्या के कारन उसका जीवन दूभर हो रहा हैं। बेटिया कही पर सुरक्षित नहीं रह गई हैं यहाँ तक कि खुद अपने घर में भी। आज भले ही हमारे घर की महिलाये बेटिया हमे सुरक्षित लग रही हो लेकिन कल हमारे साथ भी गलत हो सकता हैं। हम सभी को बेटियों के प्रति गलत सोच बदलने की जरुरत हैं। दिल्ली में हुई गैंग रैप की घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया।  ऐसी वीभत्स घटनाओ के प्रति लापरवाही क्यों दिखाई जाती हैं।अब समाज को संकीर्ण मानसिकता के दायरे से बाहर निकल कर बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच बनानी  होगी। बेटियों की ऐसी हालत कानून के लचीलेपन के कारन हैं। अपराधियों में कानून का भय नहीं रहा यही कारन हैं कि बलात्कार की घटना ये आम बात हो गयी हैं। 2911 में 2.28  लाख से भी ज्यादा अपराध हुए थे। पच्छिम बंगाल में 29 हज़ार 155 अपराध हुए थे महिलाओ के खिलाफ। दो हज़ार  ग्यारह बारह के बीच में बलात्कार के सिर्फ 5,337 मामलो मैं फैसला आया था। सबसे बड़ी बात हैं कि हमारे देश का कानून महिला के साथ हुए अन्याय को  देता हैं। कानून की निगाह में यह कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं हैं। आखिर हम क्या उम्मीद करे इस समाज   .पीड़िता अपने साथ हुए कुकृत्य को जिंदगी भर नहीं भूल सकती। कसूर वार न  उसकी दुनिया बदल जाती हैं उसे समाज और परिवार में अपमान का घुट पीना पड़ता हैं। और अपराधी खुले घूमते हैं उन्हें किसी का कोई दर नहीं होता। बेटियों के प्रति हम सभी को संवेदनशील होने की जरुरत हैं ताकि समाज और परिवार में एक अच्छा मुकाम मिल सके। बेटियों की सुरक्षा को लेकर हम सभी को सजग रहना होगा। महिलाओ के खिलाफ  बलात्कार जिस मानसिकता और माहौल की उपज हैं। उसे बदलने की कोशिश किये बगैर इस समस्या का समाधान संभव नहीं लगता। महिला को भोग की वस्तु नहीं हैं  शक्ति हैं।  बेटियों को खुद की सुरक्षा  और आत्म रक्षा के लिए कराटे या कई उपाय करने होंगे। पुलिस को भी उनकी सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतनी होंगी। माता पिता भी अपनी बेटी को कमजोर न बनाये वरन उसकी हिम्मत और मनोबल को बनाये रखे ताकि वो इस समाज और देश में सर उठाकर आत्म सम्मान के साथ जी सके।