बेटी


     क्या मैं अपनी मर्जी से जन्म लेती हूँ,या मेरा जन्म तुम्हारे जन्म की नींव नहीं है, जिसे तुम कमजोर करते जा रहे हो ,मुझे गर्भ में मारकर या जन्म के बाद मारकर।
         मैं आज की बेटी हूँ जो एक नन्ही सी कली की तरह तुम्हारे घर आँगन में खिलक सारा परिवार महकाती हूँ, बहू बनकर तुम्हारे घर आती हूँ, फिर एक माँ बनकर तुम्हारी नई पीढ़ी को जन्म देती  हूँ। 
             क्या बेटी होना अपराध है, यदि तुम्हारी नजर में बेटी होना अपराध है और तुम ऐसे ही मेरा अस्तित्व समाप्त करते जाओगे तो वो दिन दूर नहीं जब सम्पूर्ण मानव जाति का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उस दिन तुम्हें अपनी भूल का एहसास होगा, आज भी इसका असर देखने को मिल रहा है, कि प्रति हजार लड़की संख्या और लडकों की संख्या का अनुपात समान नहीं है, पुराने आंकड़े के मुताबिक लगभग 40-45 लडकियां प्रति हजार लडकों की संख्या में कम हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा बेटी को नहीं बचाया तो वो दिन दूर नहीं जब लड़की से शादी के लिए स्वयंवर होने शुरू हो जाएंगे, या लडाई शुरू हो जाएगी।   बेटा चाहिए, पर बेटी नहीं, ये क्यों नहीं सोचते कि जब मैं ही नहीं रहूंगी तो बेटा जन्मेंगा कौन? 
                  पुरूष, नारी दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं,पुरुष बीज है तो नारी धरती।
           बेटी के महत्व को समझो, बेटी की पीड़ा को समझो, कितना दर्द होता है जब बेटी ये सोचती है कि मेरे ही जनक मुझे मृत्यु दे रहे हैं, जबकि मेरी माँ भी एक बेटी थी। 
मैं बेटी हूँ ,आज मैं इस समाज के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हूँ ,देश की उन्नति में हिस्सा ले रही हूँ ,मैं नारी के रूप देश के सम्मान के लिए अपने सम्मान के लिए लड़ सकती हूँ ,यकीन नहीं तो इतिहास के पन्ने पलटकर देख लो ,वीरांगनाओँ की कहानी मिल जाएगी ।आज मैं तुमसे सिर्फ वहां पर हारी हूँ ,जहाँ मैं असहाय हूँ अबोध हूँ ,नवजात बेटी हूँ ।वहां मुझे तुमसे इस समाज से मौत का भय है ।यदि मुझे वहां से सुरक्षित बड़ा कर दिया तो मैं दिखा दूंगी कि मैं बेटी हूँ ।
         पत्नी तो सबको चाहिए, पर बेटी नहीं। अगर किसान अपनी जमीन पर विभिन्न प्रकार के अनाज न उगाएं सिर्फ एक ही फसल पैदा करें तो सारे संसार में त्राहि-त्राहि मच जाएगी। इसप्रकार यदि बेटे की ख्वाहिश में बेटी को तुम मारते रहे तो तुम्हारे कर्मों का फल भुगतने से तुम्हें कोई नहीं बचा पाएगा।

बेटी ईश्वर का वरदान हैं
बेटी से खुशिया अपार
इनको दुनियाँ में आने दो।
अपनी पहचान बनाने दो
मत समझो बेटी को बोझ इनको
ये कुदरत का उपहार हैं
गीता का ज्ञान हैं
मत समझो इनको कम
इनसे हैं रोशन जँहा