भानगढ़ यात्रा

 

बचपन
से ही भूत प्रेत की कहानियों ओर डरावनें टी वी सीरियल से बहुत डर लगता था और सोचती थी ये भूत कैसे दिखते है ।

अभी थोड़े दिन पहले क़लमकार मंच ने भानगढ में एक काव्य गोष्टी का आयोजन किया ओर सभी सखियों ने मुझे भी साथ चलने का आग्रह किया मैंने खूब मना किया कि।मुझे ऐसी।जगह।पर जाने से डर लगता है लेकिन उन्हीने कहा कि सब साथ चल रहे है कोई डरने की बात नही
पर अंत मे उन सभी के आग्रह पर भानगढ जाने का मन।बना ही।लिया
 हा मन मे एक भय जरूर था फिर सोचा कि।जो होगा देखा जाएगा हा भानगढ किले के बारे में बहुत सुना था और देखने की इच्छा भी थी
 भानगढ अलवर जिले में स्थित है और इसको भूतिया भी कहा जाता है
 हम सभी सुबह 9 बजे के करीब भानगढ की तरफ रवाना हो गए हमने जयपुर आगरा की राह पकड़ी भानगढ पहुचने के लिए रास्ते मे हमे हरियाली ऒर मनमोहक दृष्य देखने को मिले हम सभी सखियां कल्पना गोयल मीनाक्षी माथुर पुष्पा गोस्वामी उमा मिश्रा संगीता व्यास सुनीता विश्नोलिया पूजा पवन कुमार ज्योत्सना शर्मा नूतन जी सभी अंताक्षरी खेलते हुए नाचते गाते हए  भानगढ का सफर तय कर रहे थे।साथ मे रमेश शर्मा बागरी जी निशांत मिश्र जी थे जो अंताक्षरी में हमारा पूरा साथ दे रहे  थे और एक खूबसूरत सम सभी ने  मिलकर बांध दिया। और सभी रोमांचित महसूस कर रहे थे कि कैसा होगा भान गढ़ का किला।भानगढ पहुचने में हमे करीब दो घंटे का समय लगा यानी कि 11 बजे के करीब हम भानगढ पहुच गए।
 दौसा से एक सड़क बाई तरफ  भानगढ के लिए चली जाती है और सीधी सड़क भरतपुर के लिए चली जाती है भानगढ वाला रोड छोटा हो चला था  सड़के ठीक ठाक रही अब हमें ग्रामीण परिवेश में होने का अहसास हो रहा था हम सुबह ग्यारह बजे  के करीब भानगढ पहुचे।
: वहाँ पर पहुचकर सबसे सभी ने पहले  भानगढ किले से थोड़ी दूर पर स्थित एक होटल में नाश्ता किया।और होटल भी बहुत खूबसूरत बना हुआ था ग्रामीण परिवेश माहौल मिल  रहा था
: उसके बाद सभी ने क़लमकार मंच द्वारा आयोजित काव्य गोष्टी में अपनी बेहतरीन रचना प्रस्तुत की औऱ काव्य गोष्टी का समापन।हया तब तक 2 बज चुके थे और सबको।भूख लग चुकी थी खाने का समय हो चुका था और विजय राही ने वहाँ पर बहुत अच्छी व्यस्था ओर खाने का इंतज़ाम किया।हुआ था  सभी।ने स्वादिष्ट दाल बाटी चूरमा का आनंद लिया मेरी सभी सखियों ने खाने की बहुत तारीफ की । खानेके बाद म सभी सखियों ने ग्रुप फोटोग्राफ लिया और सुंदर सेल्फी ली
 सभी लीग विजय राही जी की मेहमान नवाजी से बेहद प्रभावित हुए और मुझे भी उन्होंने हमेशा छोटे भाई जैसा प्यार दिया । विजय राही एक बेहरारीन कवि ओर शायर है
खैर अब सभी लोग भानगढ के किले की ओर निकल।पड़े जो थोड़ी दूरी पर स्थित था सभी के मन मे उत्सुकता थी ऒर शायद डर भी
भानगढ किले के प्रवेश द्वार पर हनुमान मंदिर बना है यहाँ से आगे चलते ही बाजार नज़र आते है जो पहले लगा करते थे लेकिन अब वीरान ओर उजाड़ है औऱ एक नई दास्तान बयान कर रहे है। यहाँ आज खंडर है जो कल बड़ बाजार हुआ करते थे। हम एक ओर दरवाजे पर पहुचे जो महल का दरवाजा है दरवाजे के बाई  तरफ खंडर नुमा इमारत है और दाई तरफ मंदिर है यह मंदिर गोपीनाथ जी का है
 मंदिर वास्तव में सुंदर वास्तुकला का एक अनुपम उदारहण है ऒर इस  मंदिर में जाकर मैने एक सकारत्मकता का अनुभव किया ।रभी मन मे यह खयाल आया जब कभी यह मंदिर आबाद रहा होगा कितना सुंदर और मनोरम रहा होगा। यह किला तीन तरफ से अरावली की पहाड़ियों से घिरा है जो उसे ओर भी खूबसूरत बनाता है।
[: मंदिर के पास में ही पानी की बावड़ी  बनी हुई है बहुत ही सुंदर है बावड़ी के नजदीक सोमेश्वर  मंदिर बना हुआ है जो शिव को समर्पित है।। लेकिन आज यह भूतिया किला बन कर रह गया लोग यहाँ आने से डरते है । बहुत  लेखक ऒर कॉलेज के विद्यार्थी इस भानगढ के किले पर रिसर्च कर रहे है। वहाँ के रहने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि भानगढ़ किले में कोई भूत प्रेत नही है वो काफी समय से यहाँ आ रहा है।

तांत्रिक ऒर राजकुमारी की कंहानी को उसने   मनगढ़न्त बताया।लेकिन एक बात में कहना चाहूंगी कि मैं जब भानगढ किला घूम रही थी तो न जाने मुझे भी ये अहसास हुआ कि  शायद कोई शक्ति हमे भी छुप छुप के देख रही है और हमारी बाते कोई सुन रहा है। शायद डर की वजह से में भानगढ किले का ऊपरी महल घूमने नही  गई बाकी सभी लोग जी मेरे साथ थे वो सभी ऊपरका महल घूम कर आये

 भानगढ़ किले के बारे में सबके अपनी अलग विचार व भ्रंतिया है चाहे कोई कुछ कहे  भानगढ किले जाकर वहां देखना अलग  अनुभव था