माँ को नमन 

जन्मदात्री सर्वस्व की पहचान 
तेजस्विनी, समर्पित।
माँ हमारी नदी जैसी 
रहती सदा गुनगुनाती।
हर तरफ विस्तार उसका
दुनियां तेज धुप 
माँ  छाँव सी होती हैं।
आकाश का व्योम
माँ के आँचल का छोर
मीरा और सूर के पदों में माँ
ममता की मूरत सदा मुस्कुराती
दुखो को मेरे समेट जाती।
प्यार की खशबू फैलती।
हर मुश्किल में साथ देती।
हर गलती को मॉफ कर देती।
प्यार देती दुलार देती
त्याग और समर्पण से हमारा
जीवन सुधार देती।
वह धुंधला सा बचपन
जब माँ ही सच थीओर
सीख हर उनकी 
लकीर पत्थर की।
महक हैं फूल वन की।
नेह का अमृत पिलाती
प्रेम का संचय हैं 
धागे धागे यादें बुनती।
खुद को नई रुई सा बुनती।
धूप छाँव में बनी एक सी।
चेहरा नही बदलती माँ
मंदिर की आरती वो 
माँ को नमन 
neera jain