“कम भी नहीं है हौसले”

कम भी नहीं है हौसले
गिर भी पड़ी तो क्या हुआ
।जिन्दगी के सामने चुनोतियाँ 
है  तो क्या हुआ ।
अभी टूटी नही हु न ही बिखरी ।
मंजिल कि तलाश करते करते
खुद रास्ता मिलता मुझे ही जाएगा।
टूटी अगर रिश्तों की’ इक नाजुक कड़ी तो क्या हुआ।
हौंसले  कम नही सब संभल जायेंगे।।
फिर बारिशों की लग पड़ी रोती
 झड़ी तो क्या हुआ।
इक भूल ने ही जिन्दगी जीना हमें सिखला दिया
।चोटें समय के मार की खानी
 पड़ी तो क्या हुआ ।।
ताकत यही मैं टूटकर बिखरी नहीं हूँ आज तक
 
भवाटवी के घनघोर
अँधेरे में जब सर्वस्व 
विलीन हो जाता है 
दूर  तलक आशा 
की कोई किरण 
नजर नहीं आती , तब भी 
दिल के किसी कोने में 
ज़िन्दा रहती है उम्मीद 
और उम्मीद की डोर 
थामकर , कल्पना के 
सोपान चढ़ते हुए 
व्यक्ति एक जन्म से 
दूसरे कई जन्मों तक का 
सफ़र तय कर लेता है 
चन्द लमहों में , क्यूंकि 
साथ रहती है , उम्मीद 
साथ चलती है , हमसफर 
बनकर उम्मीद , बस उम्मीद 
 
 
 
 
 
“वंदे-मातरम्”
 
वतन की मिट्टी ले हाथ में,
उठाई हमने आज सौगन्ध, 
गान गूँजेगा एक ही राष्ट्र में,
वन्दे-मातरम!वन्दे-मातरम्!!
 
बैर भाव सब भुला दिये हैँ, 
कंधे से कंधा मिला लिये हैं, 
नई उम्मीदें, नई आशायें, 
नये धुन और नये सरगम,
वन्दे-मातरम्! वन्दे-मातरम्!!
 
अज्ञानता का कलंक मिटायेंगे, 
पिछड़े भी हम नहीं कहलायेंगे,
कहीं नहीं होगा कोई अभाव,
मिटेगा भूखमरी का दुष्प्रभाव, 
नई परिभाषाएँ लिख रहे हम,
वन्दे -मातरम्! वन्दे-मातरम्!!
 
ज्ञान-विज्ञान की किरणें फूटेंगी,
संकीर्णता की दीवारें भी टूटेंगी, 
दृष्टि सबकी अब बदल जायेगी, 
राजतन्त्र में भी शुचिता आयेगी, 
राष्ट्र सेवा ही हो सबका धरम, 
वन्दे-मातरम्! वन्देमातरम्!! 
 
 
 
 
कलम
 
 कलम भी क्या तन्हाई  की गजब  साथी  होती है
अनकहे उलझे सवालों को शब्दों में पिरो देती  है ।
 
लफ्जो के उठे तूफा को साहिल तक पहुँचा देती है
बिना लव खोले दिल के दर्द को जाहिर कर देती है
 
लाख कोशिश करो छिपाने की दर्दो को जमाने से
पर बेदर्दी कलम जीस्त के सारे  राज खोल देती है।
 
कोई  खुशी  हो या दर्द  चाहे दिल के दबे अहसास 
सबको संगदिल बना हाल ए दिल का सुना देती है।
 
मचल रही हो तमन्ना दिल की  रोके से भी ना रुके
जिद्दी अरमानो पर भी कलम भारी दिखाई देती है।
 
कलम की ताकत  है बेमिसाल सच्चाई अटूट हथियार 
बड़े बड़े मुखौटाबाजो को सच का आईना दिखा देती है।
 
क्या कहूँ  इसके बारे में  जितना लिखूँ  उतना है  थोड़ा 
बेसहारा तन्हा लोगो की बिगडी तकदीर सँवार देती है