मिले जब पहली बार हम, अनजान तुम लगे ही नही।
नयनो से मिले नयन याद नाही, पर नये से तुम लगे ही नही।
 
चाहत सदियो से थी, अपना बस तुम को ही जाना था
मिलते ही दिल ने पहचाना पर नयनो को भी था शर्माना 
 
तुम होते तो समय भी हमारे साथ साथ चलता ही  रहता
तुम न होते तो वो भी साथ मेरे इंतजार करता रुक जाता
 
मिले जब तुमसे ,अनजान तुम कभी लगे ही नहीं
अनछुआ सा  छुपा हुआ बहुत अभी तो बाकी है
 
तुम से ही स्पर्श तुमसे ही हर्ष तुम ही मेरे सर्वस्व
तुम से ही राग अनुराग ,प्रीत हो तुम मीत भी तुम
 
मिलना तुम से ही हर पल चाहता है ये दिल
न जाने क्यू ,मिलते ही आंखे चुरा लेता है 
 
सोचकर तुमको पुलकित हो जाता था मन 
कपकपाते दिल को मिल गया आज समर्पण
 
घडी ये रुक ही जाय, क्षण यू ही थमे  रहे
बांहो का घेरा हो , प्रेम का यही बसेरा हो