बाल  दिवस पर हिंदी कविता 

बचपन

 

çबचपन होता मासूम 

बेवरवाह 
इठलाता  बचपन 
हां याद आता 
वो बचपन 
शरारते 
वो माँ की डाट 
पिता का प्यार 
कितनी।प्यारी दुनियां इनकी
कितनी मृदु मुस्कान
ईश्वर भी इनमें बस्ते
शरारते इनकी मन
को भाती
सदा हँसते खिलखिलाते
रूठते तो मन को लुभाते
कच्ची मिट्टी जैसे होते
सच्चाई की धूप इनमें
घर आँगन को महकाते
जिस आँगन नही
बचपन
फुलवा भी वँहा नही
महकते
हा मुझे भी आता
याद  बहुत
वो प्यारा बचपन