परिवर्तन

सीमाओं के बंधन से मुक्त सदा

में रहती हूं

कर्तव्यों का पालन मु
झे नया नयहवाओं की तरह 
मुकाम देता है
डाली फूल फूल
दिशाओं में जंगल पर्वत नदी सागर
में फिरती हूं
 पानी की तरह  बहती हूं
पर्वतों से डरती हूं
खेत मैदान समुंदर तक
बादलों में
 झूमती हूं जहां मन वही होती हूं
 आसमा से दूर चांद सितारों
संग खेलती हूं
 रंगों से लिपटती हूं कविता
 सुंदरता में लीन कभी साहित्य
विविध कलाओं विद्याओं में
अध्यात्म
  के उजालों में परछाई रहित
हो जाती हूं ।
 परिवर्तन मेरी शौक है
सुख दुख में चलती रहती हूं ।
 निरंतर चलती रहती हूं
आगे बढ़ती जाती हूं
neera jain jaipur