आ जिंदगी तुझे यूं गुजरते देखा कभी गिरते तो कभी संभलते देखा

motivational

जुनून और सुकून का फर्क तभी खत्म होता है जब दिमाग से नहीं दिल से जिया जाता है पंजाब के इंकलाबी कवि  पाश  ने कहा भी है  कि प्यार करना और जीना उन्हें कभी नहीं आ सकता जिन्हें जिंदगी ने बनिया बना दिया है दिमाग अक्सर सही गलत नाप तौल में डाल देता है और दिल बरसात के पानी की तरह कहीं पर कहीं को बह जाता है दायरे तोड़ता है बहकता है बदलता है अपना रास्ता अपनी मंजिल बनाता है अब या तो घड़ी की सुई बन जाओ और एक दायरे में घूमते रहो या फिर समय बन जाओ और  बदलते रहो अगर बदलाव गलत है तोक्यों होता है हमारी जिंदगी में।
[ आती-जाती लहर हुए तो साहिल ना हो पाओगे ज़हन बने रहने वालों तुम अब दिल ना हो पाओगे
 आ जिंदगी तुझे यूं गुजरते देखा कभी गिरते तो कभी संभलते देखा