मैं अपने हाथों की लकीरों से नही उलझा

मुझे मालूम है किस्मत का लिखा भी बदलता है

खुदी पर भरोसा ही उस तिलिसम को खोलने कु चाबी है जिसे हम किस्मत कहते है। बहुत से लोग अपनी मेहनत से किस्मत का लिखा बदलते रहे है। जिंदगी में उतार चढ़ाव तो आते रहते है समंदर भी घटता  बढ़ता रहता है यहाँ कुछ निश्चित नही हर चीज़ परिवर्तनशील है।बीज पेड़ में बदल जाता है पेड़ फिर से बीज बन जाता है बीज में भविष्य का पेड़ हो जाने की संभावना रहती है ।बीज दरख़्त अपनी इच्छा शक्ति खुदी पर यकीन से ही बन पाता है। सपने ओर सच मे सिर्फ इच्छा शक्ति भर फर्क होता है।
: मैं अपने हाथों की लकीरों से नही उलझा
मुझे मालूम है किस्मत का लिखा भी बदलता है
इन हाथों की लकीरों की भी एक हद है और उसके आगे किस्मत भी बेबस हो जाती है। जीने के दो तरीक़े है पहला जो लकीरों में लिखा है उसके होने का इंतज़ार करो या जो हमारी चाहत है उसको हासिल करने में जी जान से जुट जाओ । हमने बार बार देखा है भले लकीरों में लिखो हो या न हो कर्म से किस्मत की नई लकीरे खिंच जाती है और लक्ष्य तक ले  जाती है।सच्चे  दिल से किसी लक्ष्य को पाना  चाहै  तो अवचेतन मन वहाँ तक ले ही जाता है। कर्म मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से ही  मंज़िल मिलती है। हम हिम्मत न हारे तो राह फिर आसान होती है जिंदगी की आदत  बहना होती है वो अपने रास्ते बखूभी जानती है
वर्तमान में ही जी लेना है।
भूतकाल गुज़र गया उसे बदल नही सकते ।भविष्य अनिश्चित है अज्ञात है फिर भी  हम इसी में उलझे है या तो भूत में अटके रहे या भविष्य की चिंता में उलझे रहे ।भविष्य की चिंता में हमने जीना छोड़ दिया है  लगता मुस्कुराने से परहेज है।जिस भविष्य की चिंता में इतना तनाव है वो।कोरी कल्पना से ज्यादा है ही नही क्योंकि जिसे हम भविष्य मान रहे है उसे गुज़रना तो इसी  एकक्षण से होगा   जिसे वर्तमान कहा जाता है। इस एक पल में जिसमे। हम। अभी सांसे ले रहे है फूल से  आती उसकी खुशबू को  महसूस कर रहे है  आने वाले कल के बारे में सोचना एक कल्पना है क्योंकि वो अनिश्चित है।हमे इस पल को  भरपूर जीना है  किसी से प्रेम करना है तो  भरपूर करना है गीत गाना है तो  भरपूर गाना है।