वो है पिता,।

में कच्ची मिट्टी से मजबूत साँचे में जिसने ढाला,
वो है पिता,
अच्छे व्यवहार और निःसंदेह अच्छे संस्कारों से जिसने हमें नवाज़ा,
वो है पिता,
ख़ुद के पेट को आधा काट,
हमारे पेट को जिसने हमेशा पूरा भरा,
वो है पिता,
हमारी छोटी से छोटी जरूरतों को अपने बड़े से जरूरत से ज्यादा आँक जिसने पहले उन्हें पूरा किया,
वो है पिता,
दर्द में मजबूती से हमारा हाथ थाम,
जिसने हमें हिम्मत और सहारा दिया,
वो है पिता,
अपने आँशुओं को हमारी खुशियों में पनाह दे,
जिसने हमेशा मुस्कुराहट इख़्तियार किया,
वो है पिता,
फ़रिश्तों की तरह जिसने नन्हीं सी उम्र से आज हमें बखूबी इतना बड़ा किया,
ख़ुद के पैरों पर खड़ा किया,
वो है पिता,
माँ के साथ मिलकर जिसने कई मुश्किलों से लड़कर आज हमारी ज़िंदगी को है संवारा,
वो है पिता,
नहीं मानता मैं कि ऊपर खुदा है या नहीं,
मग़र मेरेc लिए तो जो खुद खुदा है,
बस वो है मेरे पिता ।। “
neera jain jaipur