सांगानेर

Famous Jain Mandir

 

राजस्थान के प्राचीन नगरों में सांगानेर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है । सांगानेर की बसावट समतल भूमि पर है । जिसके तट पर सरस्वती नदी बहती थी ।

सांगानेर राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर से 13 किलोमीटर दूर दक्षिण की ओर स्थित है । प्राचीन ग्रंथों में इसका नाम संग्रामपुर भी मिलता है । यह नाम चतुर्थकालीन राजाओं से जुड़ा हुआ है.

संघी जी मंदिर सांगानेर

जयपुर राजस्थान की दक्षिण दिशा में लगभग 13 किलोमीटर दूरी पर सांगानेर कस्बा स्थित है

सांगानेर कस्बे में प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर है जो कि    संघी जी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है मंदिर का निर्माण कब हुआ इसका सही   आकलन। नहीं किया जा सकता लेकिन विद्वानों के अनुसार मंदिर का निर्माण निर्माण आठवीं सदी में हुआ था मंदिर के द्वार पर संवत 1011 अंकित किया हुआ है मंदिर में मूल प्रतिमा आदिनाथ भगवान की है तथा इस प्रतिमा के आगे अन्य प्रतिभाओं की वेदी बनी हुई है मंदिर में दो गुफाएं हैं जिन्हें वर्तमान में भी बदल दिया गया है प्रथम तल पर अति प्राचीन प्रतिमाएं विराजमान है तथा द्वितीय तल का निर्माण किया हुआ है  बाहरी दीवार पर 48 श्लोक शिलालेख बनाए गए हैं मान्यता है कि मंदिर 7 मंजिल का बना हुआ है परंतु अभी वर्तमान में केवल दो ही मंजिल के दर्शन होते हैं   जनता जनता दर्शन के लिए आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज ने सन 1933 में । आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज 1971 में आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज संग 1994 में तथा मुनि श्री सुधासागर जी महाराज 1999 में लाए थे जिन्हें समय पर पुनः तलघर में रखा गया और तल घर के रास्ते को बंद कर दिया गया मंदिर जी में आवास।व। खाने।  की अच्छी व्यवस्था है तथा मंदिर जी के प्रांगण में ऋषभदेव ग्रंथ माला भी है