कहते है  बढ़ने के लिए
 
 बदलना जरुरी हैं
 
 मैंने हर दिन ज़माने को 
 
रंग बदलते देखा हैं 

वक्त के साथ जिंन्दगी
 
 को रंग बदलते देखा हैं 

स्वार्थ की खातिर रिश्तो को
 
 टूटते बिखरते देखा हैं 
 
 पैसो की खातिर ईमान 
 बदलते देखा हैं 
 आगे बढ़ने की खातिर अपनों
 को छलते  देखा हैं।
  मैंने हर दिन ज़माने को 
रंग बदलते देखा हैं। 
  नेकी करने वालो को 
सजा भुगतते देखा हैं।
   लोगो को  झूठ का नकाब
 पहनते देखा हैं
   आगे बढ़ने की जानिब में 
   अपनी ही नजरो में गिरते देखा हैं
    मैंने हर दिन ज़माने को
 रंग बदलते देखा हैं।

  पैसो की खातिर ईमान बदलते देखा हैं।

 

 

 

 

 

 

नीरा जैन