रचनाकारों को मिला ‘कलमकार’ पुरस्कार ।

                                                         – शुक्रान बीट्स ने फ्यूजन म्यूजिक की सूफीयाना प्रस्तुति से जमाया रंग
 

जयपुर। कलमकार मंच की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कलमकार पुरस्कार प्रतियोगिता के विजेताओं को  के सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय में ‘कलमकार’ पुरस्कार से नवाजा गया। इस अवसर पर ‘कहानी आज’ और ‘कविता आज’ विषय पर आयोजित सत्रों में प्रबुद्ध साहित्यकारों ने संवाद किया। यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद आचार्य पुरषोत्तम उत्तम भवन सभागार में देर रात तक चले मुख्य समारोह से पूर्व “द शुक्रान बीट्स बैंड” के कलाकारों ने फ्यूजन म्यूजिक की स्वरलहरियां सूफीयाना अंदाज में प्रस्तुत कर दाद बटोरी। इस अवसर पर प्रतियोगिता के प्रतिभागियों की रचनाओं से सुसज्जित पत्रिका ‘कलमकार’ के कवर पेज का विमोचन भी किया गया।
कलमकार पुरस्कार समारोह की शुरूआत कालिंदी सभागार में प्रसिद्ध कथाकार दूधनाथ सिंह को समर्पित ‘कहानी आज’ सत्र से हुई, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार ईशमधु तलवार, कथाकार चरणसिंह पथिक, फिल्म निर्देशक गजेंद्र श्रोत्रिय एवं युवा साहित्यकार तसनीम खान ने कहानी लेखन पर संवाद किया। सत्र का संचालन अविनाश त्रिपाठी ने किया। विख्यात व्यंग्यकार सुशील सिद्धार्थ को समर्पित ‘कविता आज’ सत्र में दूरदर्शन के पूर्व निदेशक नंद भारद्वाज, मध्य प्रदेश के जाने माने कवि बहादुर पटेल, ज्ञानपीठ अनुशंसित युवा लेखिका उमा ने परिचर्चा की।
‘कहानी आज’ सत्र के मुख्य वक्ता ईश मधु तलवार ने कहा कि प्रतियोगिताएं लेखक के काम को स्थापित करने का काम करती हैं। इससे उनका हौसला बढ़ता है और वे लेखन की ओर प्रेरित होते हैं। आज जो कहानियां लिखी जा रही हैं वो युवाओं की कहानियां हैं, आज के समय को पकड़ती हुई कहानियां हैं। वहीं लेखक चरण सिंह पथिक ने कहानी कहने की विधा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यदि कहानी किसी को सोचने पर मजबूर न करे, उसे झकझोरे नहीं, उसे पढऩे में आनंद न आए तो वह कहानी नहीं। फिल्म निर्देशक गजेंद्र एस क्षोत्रिय ने कहा कि फिल्म के लिए कहानी की कलात्मकता से ज्यादा उसका प्लॉट महत्वपूर्ण होता है। जो कहानी शुरू से आखिर तक पढऩे में रोचक बनी रहती है, वही कहानी की सम्पन्नता होती है। वहीं युवा कथाकार तसनीम खान ने कहा कि गांवों में शहरों की तुलना में ज्यादा कहानियां हैं।
दूसरे सत्र ‘कविता आज’ में मुख्य वक्ता नंद भारद्वाज ने कहा कि कई प्रतिष्ठित कथाकारों ने अपने गद्य में कविता को प्रमुखता से स्थान दिया है। उनका यह भी मानना है कि लेखन की अलग-अलग विधाओं में परस्पर आवाजाही रहती है। फिर भी उनके बीच तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने कविता की यात्रा पर भी बात की। सत्र के दूसरे प्रमुख वक्ता बहादुर पटेल ने कहा कि कलमकार प्रतियोगिता की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की प्रतियोगिता से नए लेखकों को मंच मिलता है। इस सत्र का कवितामय संचालन दुष्यंत ने किया, जो कि स्वयं जाने-माने कवि हैं।
समकालीन कविता और आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर केदारनाथ सिंह को समर्पित मुख्य समारोह में पुरस्कार वितरण से पहले द शुक्रान बीट्स बैंड ने इलयास खान के निर्देशन में माहौल को संगीतमय बना दिया। गायक फैजल खान ने ‘इश्क जुनू जब हद से बढ़ जाए’ से शुरूआत करने के बाद ‘तेरी दीवानी’, ‘लग जा गले’, ‘रश्के कमर’ की दमदार प्रस्तुतियों के साथ ही सूफीयाना अंदाज में जुगलबंदियां पेश कर दर्शक-श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। फिल्म ‘चोरी चोरी’ फेम गायिका फरीदा खानम ने शुरूआत ‘आज जाने की जिद न करो’ ग़ज़ल प्रस्तुति से की। जैसे ही उन्होंने अपनी दमदार आवाज में ‘दमादम मस्त कलंदर’ की प्रस्तुति दी, सभागार में बैठा हर शख्स झूम उठा।
समारोह में रावत एजुकेशनल के सोसायटी के निदेशक नरेंद्र रावत, सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी के चेयरमैन सुनील शर्मा, ईशमधु तलवार,फिल्म निर्माता-निर्देशक गजेंद्र श्रोत्रिय, कलमकार मंच के संयोजक निशांत मिश्रा, कथाकार चरणसिंह पथिक, बहादुर पटेल आदि ने प्रतियोगिता के विजेताओं को स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि प्रदान की। समारोह के अंत में कलमकार मंच के संयोजक निशांत मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों और आगुन्तकों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन कविता माथुर और आयुषी मिश्रा ने किया।
इस प्रतियोगिता के लिए देशभर से कहानी एवं लघुकथा श्रेणी में कुल 87 और गीत, कविता एवं गजल श्रेणी में कुल 144 रचनाएं प्राप्त हुईं थीं। निर्णायक मंडल में प्रो. सत्यनारायण, पाखी के संपादक प्रेम भारद्वाज, विख्यात लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ पत्रकार एवं कथाकार ईशमधु तलवार, दूरदर्शन के पूर्व निदेशक नंद भारद्वाज, कहानीकार चरणसिंह पथिक, साहित्यकार डॉ. अनुज कुमार और मध्यप्रदेश के जाने माने साहित्यकार बहादुर पटेल, प्रदीप जिलवाने, उमा, तसनीम खान और भागचंद गूर्जर शामिल थे। प्रतियोगिता की कहानी एवं लघुकथा श्रेणी का प्रथम पुरस्कार सतना, मध्यप्रदेश निवासी वंदना अवस्थी दुबे की कहानी ‘जब हम मुसलमान थे’ को और द्वितीय व तृतीय पुरस्कार क्रमश: मुंबई के दिलीप कुमार की कहानी ‘हरि इच्छा बलवान’ और वड़ोदरा, गुजरात के ओमप्रकाश नौटियाल की कहानी ‘शतरंजी खंभा’ को दिया गया। गीत, गजल, कविता श्रेणी का प्रथम पुरस्कार कोटा, राजस्थान के ओम नागर की रचना ‘हँसी के कण्ठ में अभी रोना बचा है’ को और द्वितीय व तृतीय पुरस्कार क्रमश: नई दिल्ली की मानवी वहाणे की रचना ‘प्यारी दीदी के लिए’ और देवास, मध्यप्रदेश के मनीष शर्मा की रचना ‘अटाला’ को और दिया गया। मनोहरपुर, जयपुर के जाने माने कवि कैलाश मनहर और युवा शायरा शाइस्ता मेहजबीन को उनकी रचना के लिए सांत्वना पुरस्कार दिया गया। दोनों श्रेणियों में दस-दस सांत्वना पुरस्कार भी दिये गए।