पिता मेरे आदर्श

पिता   क्या कहूँ  ? पिता मेरा संबल है कभी मुझसे कुछ नही कहते पर हमेशा मुझे लगता बहुर्त प्यार करते मुझसे आज मुझे जो पहचान और नाम मिला वी सिर्फ उनके द्वारा दी गईं शिक्षा और संस्कारी की बदौलत ।मेरे अंदर इतना जो आर्मविश्वास ओर उत्साह ऊर्जा है ये सब उन्ही की देन है ।मेरे आदर्श है मेरे पिता।। पिता डॉ  रमेश जैन कोटा खुला विश्व विद्यालय में हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ़ जर्नलिज्म रहे पत्रकारिता विषय पर उनकी बहुत सी पुस्तके प्रकाशित हुई। राज्य और राष्ट्रीय स्तर  के बहुत से पुरस्कार उन्हें मिले। पिता डॉ रमेश जैन सरल और सहज व्यक्तित्व के धनि और शायद उन्हें में धुन के धनि भी कहती हु जो इरादा कर लिया उसको पूरा करना अपने जिंदगी में अभी भी वोबेहद मेहनती और ईमानदार हे। 
पढ़ने लिखने के संस्कार मुझे पिता से विरासत में मिले।
पिता मेरे आदर्श dr रमेश जैन को हिन्दी दिवस समारोह के अवसर पे हिन्दी भाषा में पत्रकारिता में प्रकाशित पुस्तक के लिये हिन्दी सेवा पुरस्कार से सम्मनित किया गया  आप का प्यार और स्नेह हमेशा यू ही मिलता रहे हमारी  ईश्वर से यही प्रार्थना है  परिवार की हिम्मत और विश्वास है 

khoobsurat lines

बाहर से सख्त अंदर से नर्म है
उसके दिल में दफन कई मर्म हैं।
पिता संघर्ष की आंधि यों में हौसलों की दीवार है
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।
पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी है
सबको बराबर का हक़ दिलाता यही एक महारथी है,
सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है
इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।
पिता ज़मीर है पिता जागीर है
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है,
कहने को सब ऊपर वाला देता है 
पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है।