प्रगतिशील लेखक संघ की अंचल सृजन यात्रा पहुंची बिलौना कलां
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कार्ल मार्क्स को समर्पित आयोजन में हुआ रचना पाठ और जन गीतों का कार्यक्रम
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बिलौना कलां, 6 मई।
गर्मियों में शहरों में साहित्यिक गोष्ठियां पंखे या ऐसी वाले कमरों में होती हैं, लेकिन यहाँ नजारा दूसरा था। झुलसती गर्मी में रेतीली हवाओं के बीच कार्ल मार्क्स को याद किया गया और ग्रामीण मिजाज की रचनाओं का पाठ किया गया। अवसर था, गाँवों में साहित्य ले जाने की मुहिम के तहत राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से शुरू की गई “अंचल सृजन यात्रा” का। ग्रामीण क्षेत्रों में साहित्यिक आयोजनों की श्रृंखला के तहत 5 और 6 मई को यह कार्यक्रम दौसा जिले की लालसोट तहसील के गाँव बिलौना कलां में किया गया। 5 मई को कार्ल मार्क्स की 200वीं जयंती पर उन्हें समर्पित इस दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत में जहाँ पहले दिन सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया वहीं अगले दिन रविवार को कार्ल मार्क्स को याद किया गया और उन्हें समर्पित रचनाओं  का पाठ हुआ। प्रारम्भ में आलोचक राजाराम भादू ने कार्ल मार्क्स पर बीज वक्तव्य दिया, जबकि प्रेम चंद गांधी ने उनकी चर्चित पुस्तक “दास केपिटल” का मर्म आसान शब्दों में खोल कर बताया। जाने-माने कवि ऋतुराज ने स्वयं द्वारा अनूदित कार्ल मार्क्स की एक कविता का पाठ किया।
रचना पाठ के कार्यक्रम में कृष्ण कल्पित, विनोद पदरज, प्रभात, लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’, कुमार विजय ‘राही’, रामनारायण मीना ‘हलधर’, के एफ नज़र, उमा, चित्रा भारद्वाज, निशांत मिश्रा, नीरा जैन, मीनाक्षी माथुर, नरेश प्रजापत ‘नाश’, जीसी बागड़ी आदि ने जहां काव्य पाठ किया वहीं भागचंद गुर्जर ने एक कहानी सुनाई। वरिष्ठ लेखक, पत्रकार विनोद भारद्वाज ने अपनी ग़ालिब पर लिखी जा रही पुस्तक “गली क़ासिम जान” का एक अंश पढ़ कर सुनाया। स्थानीय रचनाकारों में विख्यात हेला ख़याल गायक श्याम लाल ग्रामीण ने भी राजनीतिक रचनाएं पेश की। अध्यक्षता स्थानीय साहित्यकार ब्रज मोहन द्विवेदी ने की।
इससे पहले 5 मई की शाम नाट्य और संगीत के धुरंधर कलाकार मुकेश वर्मा की टीम ने जन गीत और लोक गीतों से समां बाँधा। उन्होंने नज़ीर अकबराबादी की बेहतरीन रचनाएं पेश की। साथ ही उन्होंने जयपुर के कवि निशांत मिश्रा का एक गीत और बिलौना कलां के शायर कुमार विजय ‘राही’ की एक ग़ज़ल को हाथों हाथ कंपोज कर बेहतरीन अंदाज़ में पेश किया।