जीवन एक नदी

बहती रहत
 कभी नहीं रुकती
सतत गतिशील
जैसी नहीं रुकते
कभी चांद और सूरज
 जैसे रुका पानी हो जाता
 ऐसे ही मत रोको खुद को
 बनाओ अपनी पहचान
 बनाओ स्वयं रास्ते कर लो
 मंजिलों से मुलाकात
निखर जाओ संवर जाओ
 विचारों को मोतियों की तरह
बिखरने दो
 फूलों की तरह महकने
दो अपने को।
तभी हमें एहसास हो पाएगा
 एक नई सुबह का और हो जाएगी
 हर राह आसान
जीत लेंगे हम जहान
जीत लेंगे हम जहान
neera jain jaipur