हमेशा जिंदगी और ज्यादा मुश्किल दिखाई देती हैं।  

हमे हमारा जीवन हर बार मुश्किल क्यूँ दिखाई प्रतीत होता हैं इस पर बात पर  यही कहूँगी कि हमारी ये जो जिंदगी हैं ऐसा लगता हैं मानो  सब कुछ हमारे आस पास होते हुए भी हमको ख़ुशी महसूस नहीं होती हमे हर चीज़ मुश्किल नज़र आती हैं हम सरल जीवन नहीं जी पाते हैं क्यों होता हैं ? अक्सर हमारे जीवन मे क्या कभी सोचा हैं। हमारे पास सब सुख सुविधाये होती हैं लेकिन हमारे पास चिंता की लकीरें साफ़ दिखाई देती हैं। जीवन में आगे बढ़ने की भूख सब कुछ भुला कर रख देती हैं। हम चीजों को प्राप्त करने में लगे रहते हैं। जिंदगी जब और मुश्किल दिखाई पड़ती हैं जब खुद को कामयाब करने के चक्कर में अपने स्वास्थ्य, प्राकृतिक सौंदर्य शांति जैसी महत्वपूर्ण ख़ुशियों की बलि चढ़ा देते हैं। हम हमारे जीवन को खुद अपने जीवन को जटिल बना लेते हैं सब कुछ पाने के लिए हम सब कुछ खो बैठते हैं ये कहा क़ि बुद्धिमता हैं। हम ये सोचते हैं कि सफल हो जाते हैं फिर खुशिया बाद में सेलिब्रेट करेंगे पर वो बाद कभी नहीं आता। हम जीवन में आगे बढ़ते रहते हैं और एक दिन हमे ये महसूस होता हैं कि हमारे हाथ से सब कुछ फिसलता जा रहा हैंजैसे बंद मुठ्ठी से रेत। ख़ुशियाँ हमारे पास होती हैं मगर उसको बाँटने वाला कोई नहीं होता। कुछ पाने की ख़्वाहिश में हम सारा जीवन लगा देते हैं और अंत में वही पर निरर्थक हो जाता हैं। सबसे बड़ी बात यह हैं  कि जीवन हमे ज्यादा निरर्थक लगने लगता हैं। हम नकारात्मक होते हैं तो डिप्रेशन में चले जाते हैं।  भी एक कारण हैं कोई  भी ख्वाहिश हैं अगर वो पूरी नहीं होती तो हम निराश हो जाते हैं। हम भूतकाल में हुई बातो को लेकर चिंतित रहते हैं इसका सीधा असर हमारे वर्तमान पर पड़ता हैं। हम अनावश्यक दवाब में रहने लगते हैं। इसका प्रभाव हमारे परिवार पर तो पड़ता ही हैं साथ ही हमारी कार्य कुशलता और उत्पादन  क्षमता पर पड़ता हैं। जिसके कारण हमारे जीवन मे कई नई चुनोतिया कड़ी होने लगती हैं।  सफलता नहीं मिलती तो हम नकारात्मक हो जाते हैं हमारा मन शांत  नहीं होता  सब बाते हमारे जीवन में मुश्किलें बढ़ाती हैं। सफलता एक अंतहीन यात्रा हैं इसके नाम पर चलने में मज़ा नहीं बल्कि झूम कर बाँसुरी बजाकर चलने में आता हैं। जिंदगी को आसान बनाना सिर्फ हमारे ही हाथो में होता हैं कई बार हम वर्तमान के बारे मै नहीं सोच कर भविष्य के बारे में सोचने लग जाते हैं और हम चिंतित हो जाते हैं कि कैसे होगा क्या होगा। उसका असर हमारे वर्तमान ओर हमारी खुशियों पर पड़ता है सबसे  बड़ी बात ये हैं कि हम जो वर्तमान में जी रहे हैं उनमे ख़ुशियों के पल बटोरने चाहिए। इससे हमारा जीवन के प्रति नज़रिया सकारात्मक होगा और हमारा भविष्य भी निचिंत रूप से उज्जवन बनेगा। हमारे जीवन में  सुख भी है दुःख भी है, अच्छाई भी है बुराई भी है। जहाँ अच्छा वक्त हमें खुशी देता है, वहीं बुरा वक्त हमें मजबूत बनाता है। हम अपनी जिन्दगी की सभी घटनाओं पर नियंत्रण नही रख सकते, पर उनसे निपटने के लिये सकारात्मक सोच के साथ सही तरीका तो अपना ही सकते हैं। कई लोग अपनी पहली असफलता से इतना परेशान हो जाते हैं कि अपने लक्ष्य को ही छोङ देते हैं। कभी-कभी तो अवसाद में चले जाते हैं।  भी अपने जीवन में कई बार असफल हुए और अवसाद में भी गए, किन्तु उनके साहस और सहनशीलता के गुण ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सफलता दिलाई। अब्राहम लिंकम अनेकों चुनाव हारने के बाद 52 वर्ष की उम्र में अमेरिका के राष्ट्रपती चुने गए।  असफल होने पर आम आदमी मायूस होकर सुरक्षित और पलायनवादी नज़रिया अपनाता है, जबकि विजेता हर असफलता को एक नए अवसर के रूप में लेते हैं और नए रिकार्ड बनाते हैं। यदि आपने मन में ठान लिया है कि जीत मेरी ही होनी है तो कोई कारण नहीं कि आप सफल न हों, क्योंकि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत”,जीवन मुश्किल नहीं आसान हो जाएगा और हम  खुशियों के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।